बिहार के बेगूसराय जिले में खनन विभाग द्वारा बालू और मिट्टी खनन के लिए जारी एक निविदा (टेंडर) को लेकर ग्रामीणों में भारी असंतोष है। यह निविदा नगर परिषद क्षेत्र में बजलपुरा गंगा घाट से मधुरपुर बोल्डर बांध तक के क्षेत्रों से संबंधित है। ग्रामीणों, जिनमें अरुण कुमार सिंह और पूर्व पार्षद कन्हैया कुमार शामिल हैं, का कहना है कि यह भूमि उनकी पैतृक और पंजीकृत संपत्ति है, जिस पर वे कई वर्षों से खेती कर रहे हैं। वे इस निविदा को रद्द करने की मांग कर रहे हैं और चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे आंदोलन करेंगे। यह भूमि वर्तमान में बाढ़ के कारण जलमग्न है, लेकिन पानी घटने के बाद ठेकेदारों द्वारा खनन कार्य शुरू करने की उम्मीद है। यह घटना 9 अगस्त, 2026 को सामने आई।
बिहार सरकार का खान एवं भूविज्ञान विभाग बालू खनन निविदाओं और नीतियों का प्राथमिक प्राधिकरण है। इस विशेष बेगूसराय निविदा में किसी विशिष्ट कंपनी का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन बिहार में बालू खनन के व्यापक संदर्भ में विभिन्न ठेकेदार और पट्टाधारक शामिल होते हैं। राज्य में बालू खनन की स्थिति में लगातार चुनौतियां और नीतिगत बदलाव देखे जा रहे हैं। बिहार खनिज (रियायत, अवैध खनन की रोकथाम, परिवहन और भंडारण) संशोधन नियम, 2026, 6 मई, 2026 को लागू हुए, जिन्होंने नियमों को मजबूत किया और पट्टाधारकों के लिए अनुमोदित सीमा से अधिक खनन करने पर अतिरिक्त रॉयल्टी (सरकार को भुगतान) का भुगतान अनिवार्य कर दिया।
यह स्थिति बिहार के व्यवसायों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), व्यापारियों, श्रमिकों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण प्रभाव डालती है। 10 अगस्त, 2026 तक, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिहार के 52% से अधिक चिह्नित बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, जिससे संभावित राजस्व हानि और अवैध खनन में वृद्धि की चिंताएं बढ़ गई हैं। इसके अतिरिक्त, 10 जिलों में 22 बालू घाट पर्यावरणीय मंजूरी लंबित होने के कारण गैर-परिचालन में हैं, जिसके परिणामस्वरूप 8 अगस्त, 2026 तक लगभग ₹153.40 करोड़ का अनुमानित राजस्व नुकसान हुआ है। राज्य सरकार अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए एक विशेष पुलिस बल बनाने पर भी विचार कर रही है, जिसका प्रस्ताव 11 जुलाई, 2026 तक विचाराधीन है। खान एवं भूविज्ञान विभाग नए संभावित बालू घाटों का सर्वेक्षण कर रहा है, जिसका लक्ष्य उनकी संख्या में 8-10% की वृद्धि करना है। बालू घाटों की नीलामी में देरी और निजी भूमि पर खनन को लेकर विवादों से बालू की कमी होती है, जो निर्माण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है। इस कमी से कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे निर्माण परियोजनाओं, रियल एस्टेट विकास और संबंधित MSMEs और दैनिक वेतन भोगी श्रमिकों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अवैध खनन की व्यापकता एक अस्थिर और असुरक्षित व्यावसायिक वातावरण बनाती है, जिससे वैध चैनलों से राजस्व का विचलन होता है।
