किशनगंज जिले के ठाकुरगंज नगर पंचायत में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित स्वच्छता निविदा (tender) को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। घर-घर कचरा संग्रह, कचरा निपटान और रात्रि सफाई सहित विभिन्न स्वच्छता गतिविधियों की अनुमानित लागत (estimated cost) में भारी वृद्धि पर सवाल उठाए गए हैं। यह मामला स्थानीय व्यवसायों, एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों), व्यापारियों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सार्वजनिक खरीद (public procurement) में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न उठाता है।
नई निविदा सूचना (NIT) के अनुसार, 2026-27 के लिए 24 महीने की अवधि हेतु अनुमानित लागत लगभग 4.77 करोड़ रुपये प्रस्तावित की गई है, जो प्रति माह लगभग 19.89 लाख रुपये बैठती है। यह आंकड़ा पिछली निविदाओं की तुलना में काफी अधिक है। उदाहरण के लिए, 2024-25 के लिए स्वच्छता निविदा की मासिक लागत लगभग 13.97 लाख रुपये थी, और सितंबर 2025 से अगस्त 2026 तक यह बढ़कर लगभग 15.37 लाख रुपये प्रति माह हो गई थी। वर्तमान प्रस्ताव 2024-25 की निविदा की तुलना में प्रति माह लगभग 6.09 लाख रुपये की वृद्धि दर्शाता है, जो व्यय में लगभग 44.16% की बढ़ोतरी है। नई निविदा के लिए सुरक्षा जमा (security deposit) 9,54,913 रुपये निर्धारित की गई है।
वार्ड नंबर 12 के निवासी और मुख्य शिकायतकर्ता विवेक कुमार साहा ने इस वृद्धि की स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय जांच की औपचारिक मांग की है। उन्होंने विभागीय दिशानिर्देशों का हवाला दिया है, जिनके अनुसार मौजूदा खर्चों में 30% से अधिक की वृद्धि से बचना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता आलोक कुमार ने भी निष्पक्ष जांच का आह्वान किया है। यह शिकायत मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई है।
नगर स्वच्छता पदाधिकारी ऋतिक श्रीवास्तव ने जवाब में कहा है कि निविदा प्रक्रिया विभागीय नियमों और दिशानिर्देशों के अनुसार ही की जा रही है। ठाकुरगंज नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी मनीषा कुमारी हैं। निविदा राशि में अनुचित वृद्धि से सार्वजनिक धन का अक्षम उपयोग हो सकता है, जिससे अन्य आवश्यक विकास परियोजनाओं से संसाधन हट सकते हैं। यह स्थानीय व्यवसायों और एमएसएमई के बीच निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को भी बाधित कर सकता है, जिससे पक्षपात या पारदर्शिता की कमी का माहौल बन सकता है।
