बिहार सरकार ने राज्य में पत्थर खनन को फिर से शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। शेखपुरा जिले में 11 पहाड़ी प्लॉटों से पत्थर निकालने के लिए ऑनलाइन टेंडर (निविदा) प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। यह कदम बिहार की अन्य राज्यों पर पत्थर आपूर्ति के लिए निर्भरता कम करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
बिहार खान एवं भूतत्व विभाग इस पहल में प्रमुख भूमिका निभा रहा है। शेखपुरा के जिला खनिज विकास पदाधिकारी सचिन प्रकाश ने प्रक्रिया की निगरानी की। इन 11 प्लॉटों के लिए ऑनलाइन टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि 8 सितंबर, 2026 थी। सरकार को इन 11 प्लॉटों से अगले पांच वर्षों में लगभग ₹250 करोड़ का राजस्व मिलने की उम्मीद है। जून 2026 के शुरुआती अनुमानों में इन प्लॉटों से सालाना ₹170 करोड़ की आय का सुझाव दिया गया था।
यह पहल नवादा, रोहतास, औरंगाबाद, गया और शेखपुरा सहित छह जिलों में पत्थर खनन के विस्तार के राज्यव्यापी प्रयास का हिस्सा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि राज्य भर में खनन कार्य 15 अक्टूबर, 2026 के बाद फिर से शुरू होने की उम्मीद है। राज्य में पत्थर चिप्स और एग्रीगेट्स (निर्माण में उपयोग होने वाले छोटे पत्थर) के संगठित खनन से लगभग ₹2,300 करोड़ का राजस्व मिलने का अनुमान है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार खान एवं भूतत्व विभाग ने ₹3,592.60 करोड़ का राजस्व दर्ज किया था, और राज्य का खनन राजस्व 2028 तक ₹5,000 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। 2026 से 2031 की अवधि को बिहार के लिए "खनन का दशक" कहा जा रहा है।
इस पहल का बिहार के व्यवसायों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), व्यापारियों, श्रमिकों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण महत्व है। स्थानीय स्तर पर पत्थर और एग्रीगेट्स की उपलब्धता से सड़कों, पुलों और भवनों के निर्माण लागत में कमी आएगी। पहले, झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से सामग्री आयात करने पर उच्च परिवहन लागत और करों के कारण निर्माण लागत बढ़ जाती थी। इससे आवास और सार्वजनिक कार्यों को अधिक किफायती बनाने में मदद मिलेगी। खनन के फिर से खुलने से स्थानीय समुदायों के लिए खनन और संबंधित क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। रॉयल्टी (खनन के अधिकार के लिए सरकार को दिया जाने वाला शुल्क) से बढ़ा हुआ राजस्व राज्य की विकास परियोजनाओं में योगदान देगा और केंद्रीय अनुदानों पर इसकी निर्भरता कम करेगा।
खान एवं भूतत्व मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भी राज्य की खनन पहलों के संबंध में बयान दिए हैं। सरकार अवैध खनन पर अंकुश लगाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 24/7 कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और जियो-फेंसिंग जैसे उपाय भी लागू कर रही है।
