सीतामढ़ी नगर निगम में निविदा प्रक्रिया में तकनीकी खामियों पर विवाद, समिति सदस्यों ने हस्ताक्षर करने से इनकार किया

ThisNews Desk
सीतामढ़ी नगर निगम में निविदा प्रक्रिया में तकनीकी खामियों पर विवाद, समिति सदस्यों ने हस्ताक्षर करने से इनकार किया
चित्र: Turgay Koca / Pexels

बिहार के सीतामढ़ी नगर निगम में मंगलवार, 23 सितंबर 2026 को हुई क्रय एवं निविदा निष्पादन समिति की बैठक में एक बड़ा विवाद सामने आया। यह बैठक निविदा प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए बुलाई गई थी, लेकिन इसमें कई तकनीकी खामियां पाए जाने के बाद सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों ने बैठक रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया।

निविदा प्रक्रिया, जिसे बोलचाल की भाषा में ठेका प्रक्रिया भी कहते हैं, सरकारी विभागों या नगर निगम जैसे निकायों द्वारा किसी काम को करवाने या सामान खरीदने के लिए कंपनियों या ठेकेदारों से प्रस्ताव (बोली) आमंत्रित करने का एक तरीका है। इसका उद्देश्य सबसे अच्छी गुणवत्ता और सबसे कम कीमत पर काम करवाना होता है, और यह सुनिश्चित करना होता है कि प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष हो। 'तकनीकी खामियां' का मतलब है कि निविदा दस्तावेजों को तैयार करने, बोलियों का मूल्यांकन करने या नियमों का पालन करने में कुछ गड़बड़ियां या त्रुटियां थीं। ये खामियां प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठा सकती हैं, जिससे योग्य ठेकेदारों को नुकसान हो सकता है और निगम को सही सेवा या उत्पाद नहीं मिल पाता।

बैठक में अधिकारियों ने निविदा प्रक्रिया में कई तकनीकी खामियों की पहचान की। इन खामियों के सामने आने के बाद सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई। समिति के सदस्यों का बैठक रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने से इनकार करना यह दर्शाता है कि वे इन खामियों से सहमत नहीं थे और उन्होंने बैठक में लिए गए या प्रस्तावित निर्णयों को स्वीकार नहीं किया। किसी भी आधिकारिक बैठक में रजिस्टर पर हस्ताक्षर करना कार्यवाही की स्वीकृति का प्रतीक होता है। हस्ताक्षर न करने का मतलब है कि सदस्य बैठक की वैधता या उसमें हुई चर्चा और निर्णयों पर सवाल उठा रहे हैं।

यह घटना सीतामढ़ी नगर निगम में निविदाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। छोटे व्यवसायियों, ठेकेदारों और उद्यमियों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि निविदा प्रक्रिया में तकनीकी खामियां न केवल प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करती हैं बल्कि सार्वजनिक धन के उचित उपयोग पर भी असर डालती हैं। इस विवाद के कारण निगम के आगामी विकास कार्यों और परियोजनाओं पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि जब तक निविदा प्रक्रिया में सुधार नहीं होता, तब तक नए काम शुरू करने में बाधा आ सकती है। भविष्य में ऐसी खामियों से बचने और एक समान तथा पारदर्शी अवसर सुनिश्चित करने के लिए आगे के कदम अपेक्षित हैं।

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