पूर्णिया, बिहार में 70 लाख रुपये से अधिक की विकास योजनाएं पिछले 15 महीनों से ठप पड़ी हैं। इन परियोजनाओं के रुकने का मुख्य कारण बार-बार निविदाओं का रद्द होना और प्रशासनिक देरी है। यह जानकारी 13 सितंबर, 2026 को पूर्णिया नगर निगम की बोर्ड बैठक में सामने आई, जिसकी अध्यक्षता महापौर विभा कुमारी ने की।
छोटे व्यवसायों, ठेकेदारों और उद्यमियों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। विकास योजनाओं का अर्थ है सड़कों का निर्माण, जल निकासी व्यवस्था में सुधार, सार्वजनिक सुविधाओं का विकास और अन्य महत्वपूर्ण कार्य जो शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करते हैं। जब ये योजनाएं रुक जाती हैं, तो न केवल शहर का विकास बाधित होता है, बल्कि उन स्थानीय ठेकेदारों और मजदूरों को भी काम नहीं मिल पाता जो इन परियोजनाओं पर निर्भर रहते हैं।
निविदा (टेंडर) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत सरकारी विभाग या नगर निगम किसी काम को करवाने या कोई सामान खरीदने के लिए कंपनियों या ठेकेदारों से प्रस्ताव आमंत्रित करते हैं। जो कंपनी या ठेकेदार सबसे अच्छी शर्तों पर काम करने को तैयार होता है, उसे ठेका मिलता है। बार-बार निविदाओं का रद्द होना यानी कि यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है, जिससे काम शुरू ही नहीं हो पा रहा। ठेकेदारों को निविदा प्रक्रिया में भाग लेने के लिए काफी समय और पैसा खर्च करना पड़ता है, और जब निविदा रद्द हो जाती है, तो उनका यह प्रयास व्यर्थ चला जाता है।
इसके साथ ही, प्रशासनिक देरी का मतलब है कि सरकारी दफ्तरों में फाइलों को आगे बढ़ाने, मंजूरी देने या निर्णय लेने में अनावश्यक रूप से समय लग रहा है। यह देरी भी परियोजनाओं को शुरू होने से रोकती है या उन्हें बीच में ही अटका देती है। इन दोनों कारणों से पूर्णिया में 70 लाख रुपये से अधिक की योजनाएं 15 महीनों से अधर में लटकी हुई हैं।
नगर निगम की बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई, जहां वार्ड पार्षदों ने भी इन देरी पर अपनी चिंता व्यक्त की। यह आवश्यक है कि इन प्रशासनिक बाधाओं को दूर किया जाए और निविदा प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जाए ताकि विकास कार्य फिर से शुरू हो सकें और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिल सके। इन योजनाओं के समय पर पूरा होने से न केवल शहर के नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि स्थानीय व्यवसायों और श्रमिकों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
