बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के जिलाधिकारियों (DMs) को औद्योगिक परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया है। यह महत्वपूर्ण निर्देश 16 अक्टूबर, 2026 को पटना में उद्योग विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान जारी किया गया। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि समय पर भूमि की उपलब्धता बिहार में निवेश आकर्षित करने, रोजगार के अवसर पैदा करने और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आगामी औद्योगिक इकाइयों के लिए अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी लाने और भूमि उपलब्ध कराने वाले लोगों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए त्वरित विभागीय कार्रवाई, विभिन्न एजेंसियों के बीच घनिष्ठ समन्वय और निर्धारित समय-सीमा के भीतर योजनाओं को लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस बैठक में औद्योगिक विकास को गति देने, निवेश की संभावनाओं का दोहन करने और प्रस्तावित तथा चल रही औद्योगिक परियोजनाओं में तेजी लाने के उपायों की भी समीक्षा की गई।
यह पहल बिहार के छोटे व्यवसायों (MSMEs), ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण है। भूमि की उपलब्धता अक्सर औद्योगिक विस्तार में एक बड़ी बाधा (bottleneck) रही है। इस निर्देश से यह बाधा दूर होने की उम्मीद है, जिससे नए उद्योग स्थापित करना और मौजूदा उद्योगों का विस्तार करना आसान हो जाएगा। भूमि अधिग्रहण में तेजी और भू-स्वामियों को समय पर मुआवजा मिलने से औद्योगिक इकाइयों के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचा (infrastructure) तैयार करने में मदद मिलेगी।
बैठक में उद्योग सचिव कुंदन कुमार ने राज्य की औद्योगिक नीति और भूमि अधिग्रहण की स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल, उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और अन्य वरिष्ठ विभागीय सचिव भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
हालांकि इस बैठक में किसी विशिष्ट निवेश राशि या रोजगार के आंकड़ों की घोषणा नहीं की गई, लेकिन इसका मुख्य लक्ष्य नए रोजगार के अवसर पैदा करना और राज्य में निवेश बढ़ाना है। सरकार की प्राथमिकता औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक बुनियादी ढाँचा उपलब्ध कराना और निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल बनाना है, ताकि उद्योगों की स्थापना और विस्तार की प्रक्रियाएँ समयबद्ध तरीके से पूरी हो सकें। यह कदम बिहार को औद्योगिक मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान दिलाने में सहायक होगा।
