मुजफ्फरपुर में ₹140.95 करोड़ के मेगा लेदर क्लस्टर का उद्घाटन, हजारों रोजगार का लक्ष्य

ThisNews Desk
मुजफ्फरपुर में ₹140.95 करोड़ के मेगा लेदर क्लस्टर का उद्घाटन, हजारों रोजगार का लक्ष्य
चित्र: Tom Fisk / Pexels

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को मुजफ्फरपुर जिले के मोतीपुर ब्लॉक स्थित महवल औद्योगिक क्षेत्र में ₹140.95 करोड़ की लागत से बने मेगा लेदर, फुटवियर और एक्सेसरीज क्लस्टर और कॉमन फैसिलिटी सेंटर का उद्घाटन किया। बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) द्वारा 62.17 एकड़ में विकसित यह परियोजना आधुनिक औद्योगिक बुनियादी ढाँचे और साझा सुविधा केंद्र (CFC) से लैस है, जो चमड़ा, जूते और संबंधित सामान बनाने वाली विनिर्माण इकाइयों को आवश्यक सहायता प्रदान करेगा।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह, केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी, पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री रमा निषाद, पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता और सांसद वीणा देवी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार भी इस कार्यक्रम में मौजूद रहे।

उद्घाटन समारोह में विभिन्न औद्योगिक इकाइयों को औद्योगिक शेड और भूमि के आवंटन पत्र वितरित किए गए। कौशल विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बिहार उद्योग विभाग और फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट (FDDI) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता युवाओं को चमड़ा और फुटवियर उद्योग के लिए प्रशिक्षित करने में मदद करेगा। इस क्लस्टर में 24 शेड में उत्पादन गतिविधियाँ पहले ही शुरू हो चुकी हैं, जो इसकी कार्यशीलता का प्रमाण है।

यह पहल बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य राज्य में निवेश आकर्षित करना, विनिर्माण का विस्तार करना और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार का लक्ष्य 2030 से पहले लगभग 12 लाख लोगों को राज्य के भीतर ही रोजगार प्रदान करना है, जो वर्तमान में काम के लिए अन्य राज्यों में पलायन करते हैं। इस क्लस्टर से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है, जिसमें 1,000 से अधिक जीविका दीदियों को पहले ही रोजगार मिल चुका है।

यह परियोजना बिहार के छोटे और मध्यम व्यवसायों (MSMEs), ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह उन्हें आधुनिक बुनियादी ढाँचा, साझा सुविधाएँ (जैसे महँगी मशीनें और सेवाएँ जो कई इकाइयाँ मिलकर उपयोग कर सकें) और कौशल प्रशिक्षण प्रदान करेगी। इससे स्थानीय निर्माता राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे और 'मेड इन बिहार' उत्पादों को एक नई पहचान मिलेगी। राज्य सरकार औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025 (BIIPP-2025) और बिहार औद्योगिक नीति 2026 के तहत विभिन्न प्रोत्साहन भी दे रही है। सरकार का ध्यान केवल निवेश प्रस्ताव प्राप्त करने पर नहीं, बल्कि ज़मीन पर चालू कारखाने स्थापित करने पर है, ताकि औद्योगिक विस्तार से स्थानीय रोजगार सुनिश्चित हो सके।

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