बिहार कैबिनेट ने 'बिहार ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2026' को दी मंजूरी: 2031 तक 1 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य

ThisNews Desk
बिहार कैबिनेट ने 'बिहार ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2026' को दी मंजूरी: 2031 तक 1 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य
चित्र: Marek Pavlík / Pexels

बिहार राज्य कैबिनेट ने 30 सितंबर, 2026 को ऐतिहासिक 'बिहार ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2026' को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है। यह नीति बिहार में हरित हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था को विकसित करने के लिए एक व्यापक और मजबूत ढांचा स्थापित करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना, राज्य में कार्बन उत्सर्जन को प्रभावी ढंग से कम करना और ऊर्जा के लिए आयातित प्राकृतिक गैस पर बिहार की निर्भरता को घटाना है। यह कदम राज्य के छोटे व्यवसायियों, ठेकेदारों और उद्यमियों के लिए ऊर्जा उत्पादन, उपकरण आपूर्ति और संबंधित सेवाओं के क्षेत्र में नए और महत्वपूर्ण व्यावसायिक अवसर पैदा करेगा।

हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen) एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है। इसे पानी को इलेक्ट्रोलाइसिस नामक प्रक्रिया द्वारा हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित करके बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में उपयोग होने वाली बिजली पूरी तरह से नवीकरणीय स्रोतों, जैसे सौर ऊर्जा या पवन ऊर्जा से प्राप्त होती है। इसका अर्थ है कि हरित हाइड्रोजन के उत्पादन में कोई भी हानिकारक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित नहीं होती, जिससे यह पर्यावरण के लिए अत्यंत अनुकूल ईंधन बन जाता है। यह नीति बिहार को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर ले जाने और एक स्थायी भविष्य की नींव रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस नीति का एक अत्यंत महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है: वर्ष 2031 तक सालाना 100,000 टन (जो कि 0.1 मिलियन मीट्रिक टन के बराबर है) हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करना। इस विशाल लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, नीति में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के विकास की परिकल्पना की गई है। इसमें लगभग 1 गीगावाट (GW) की इलेक्ट्रोलाइजर क्षमता स्थापित करना शामिल है। इलेक्ट्रोलाइजर वे विशेष उपकरण होते हैं जो पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़ने का काम करते हैं। इसके अतिरिक्त, हरित हाइड्रोजन और उसके व्युत्पन्न उत्पादों के उत्पादन के लिए लगभग 2.5 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता (जैसे सौर और पवन ऊर्जा संयंत्र) स्थापित की जाएगी। इतनी बड़ी क्षमता का विकास राज्य में भारी निवेश आकर्षित करेगा और विनिर्माण, स्थापना तथा रखरखाव के क्षेत्रों में हजारों नए रोजगार के अवसर पैदा करेगा।

इस महत्वपूर्ण नीति का मसौदा सबसे पहले अप्रैल 2026 में जारी किया गया था। इसके बाद, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 21 सितंबर, 2026 को इसकी गहन समीक्षा की, जिसके उपरांत इसे राज्य कैबिनेट से अंतिम मंजूरी मिली। 'बिहार ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2026' बिहार के औद्योगिक परिदृश्य को बदलने और इसे स्वच्छ ऊर्जा के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखती है। यह कदम न केवल राज्य के आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करेगा, बल्कि व्यवसायों को एक स्थायी और पर्यावरण-अनुकूल भविष्य की ओर बढ़ने में भी मदद करेगा, जिससे बिहार देश के हरित ऊर्जा लक्ष्यों में एक अग्रणी भूमिका निभा सकेगा।

इंफ्रास्ट्रक्चर में और पढ़ें