बक्सर, बिहार: बक्सर नगर परिषद द्वारा शहर के 19 छठ घाटों की सफाई के लिए शुरू की गई निविदा (टेंडर) प्रक्रिया सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को ठेकेदारों के हंगामे के कारण बाधित हो गई। यह पहली बार है जब छठ घाटों की सफाई का काम विभागीय स्तर पर न कराकर निविदा के माध्यम से कराया जा रहा है, जिसका उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
निविदा खुलने के दौरान, कुल 11 ठेकेदारों ने अपनी बोलियां जमा की थीं, लेकिन उनमें से केवल तीन ठेकेदारों ने ही अपने निविदा लिफाफों के बाहर संबंधित घाट का नाम स्पष्ट रूप से लिखा था। नगर परिषद ने इन तीन ठेकेदारों की बोलियां खोलना शुरू किया, जिस पर अन्य ठेकेदारों ने कड़ा विरोध जताया। विरोध कर रहे ठेकेदारों का तर्क था कि लिफाफे के अंदर सभी आवश्यक विवरण मौजूद थे और केवल बाहरी लिफाफे पर घाट का नाम न लिखने के कारण उनकी बोलियों को अमान्य नहीं किया जाना चाहिए। इस विवाद के कारण निविदा खोलने की प्रक्रिया रुक गई और इसे रद्द करने की मांग उठाई गई।
बक्सर नगर परिषद के कार्यवाहक अध्यक्ष और कार्यपालक अधिकारी ने पहले ही कहा था कि छठ पूजा की तैयारियों में पारदर्शिता लाने के लिए निविदा प्रक्रिया अपनाई गई है। इससे पहले, 10 अक्टूबर 2026 को पूर्व वार्ड पार्षद राकेश कुमार सिंह ने भी शहरी विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर निविदा प्रक्रिया अपनाने की वकालत की थी। उन्होंने जोर दिया था कि निविदा से काम की गुणवत्ता बेहतर होगी, सार्वजनिक धन की बचत होगी और जवाबदेही बढ़ेगी, क्योंकि छठ व्यवस्था पर सालाना लाखों रुपये खर्च होते हैं।
फिलहाल, निविदा खोलने की प्रक्रिया बाधित है और इसे रद्द करने की संभावना पर चर्चा चल रही है। हालांकि, जिन तीन ठेकेदारों की बोलियां वैध मानी गई थीं, उन्होंने किसी भी रद्दीकरण पर आपत्ति जताई है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस मामले पर शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। यह स्थिति बक्सर के स्थानीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और ठेकेदारों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि निविदा का उद्देश्य निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना था, लेकिन मौजूदा विवाद 11 ठेकेदारों के काम पाने की क्षमता को सीधे प्रभावित कर रहा है।
