बिहार सरकार ने 15 अक्टूबर, 2026 के बाद राज्य में खनन गतिविधियाँ फिर से शुरू कर दी हैं। बिहार खनन विभाग विभिन्न खनिज ब्लॉकों के लिए निविदा प्रक्रियाएँ (टेंडर) चला रहा है, जिसका उद्देश्य राज्य की अर्थव्यवस्था और राजस्व को महत्वपूर्ण बढ़ावा देना है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 17 अगस्त, 2026 को घोषणा की थी कि 28 महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों के लिए निविदा प्रक्रिया चल रही है। सरकार का लक्ष्य सितंबर 2026 के अंत तक 30 से अधिक ब्लॉकों का आवंटन करना है। इसके अतिरिक्त, अगले नौ महीनों के भीतर 44 खनन ब्लॉकों का सर्वेक्षण कर उन्हें परिचालन में लाने की योजना है।
बिहार खान एवं भूविज्ञान विभाग, जिसका नेतृत्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा कर रहे हैं, राज्य के खनन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला रहा है। विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में ₹3,592.60 करोड़ का राजस्व दर्ज किया, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में ₹56.39 करोड़ अधिक था। विभाग का लक्ष्य ₹3,850 करोड़ का राजस्व प्राप्त करना है। मुख्यमंत्री चौधरी ने नवंबर 2026 तक ₹5 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित करने और 2030 तक एक करोड़ नौकरियाँ पैदा करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
खनन गतिविधियों की बहाली और चल रही निविदा प्रक्रियाएँ बिहार के व्यवसायों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), ठेकेदारों, व्यापारियों और श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनसे राज्य के लिए पर्याप्त राजस्व उत्पन्न होने, रोजगार के अवसर पैदा होने और खनन तथा खनिज प्रसंस्करण से जुड़े उद्योगों को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
राज्य अब रेत, पत्थर के चिप्स और मूरम जैसे निर्माण संबंधी खनिजों के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की खोज पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। अवैध खनन पर अंकुश लगाने और राजस्व के रिसाव (राजस्व के नुकसान) को रोकने के लिए, बिहार में प्रवेश करने वाले छोटे खनिजों के लिए अनिवार्य पारगमन पास (transit passes) जैसे नए नियम लागू किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, जिन कंपनियों ने 2025-2026 में घाटे के कारण रेत खनन पट्टों को सरेंडर कर दिया था, उन्हें नई निविदाओं में भाग लेने से रोक दिया जाएगा। यह कदम बिहार को कृषि-केंद्रित अर्थव्यवस्था से खनिज अन्वेषण और औद्योगिक विकास की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण है।
