किशनगंज-जलालगढ़ नई रेल लाइन परियोजना: टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति मिली, लागत ₹1,852 करोड़

ThisNews Desk
किशनगंज-जलालगढ़ नई रेल लाइन परियोजना: टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति मिली, लागत ₹1,852 करोड़
चित्र: Zülfü Demir📸 / Pexels

बिहार के सीमांचल क्षेत्र के लिए बहुप्रतीक्षित किशनगंज-जलालगढ़ नई रेल लाइन परियोजना ने 2026 में महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है। केंद्र सरकार द्वारा इसे 'विशेष रेलवे परियोजना' के रूप में अधिसूचित किए जाने के बाद, अब इस परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति मिल गई है। यह 51.632 किलोमीटर लंबी ब्रॉड गेज रेल लाइन किशनगंज और जलालगढ़ को जोड़ेगी, जिससे बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच रेल संपर्क मजबूत होगा।

यह परियोजना मूल रूप से 2008-09 के रेलवे बजट में स्वीकृत की गई थी। उस समय इसकी अनुमानित लागत 360 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर लगभग 1,852 करोड़ रुपये हो गई है। लागत में यह वृद्धि मुख्य रूप से 17 वर्षों से अधिक समय तक भूमि अधिग्रहण में देरी और निर्माण लागत में वृद्धि के कारण हुई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस और अन्य नई लाइन परियोजनाओं के लिए 170.8 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) द्वारा 28 जुलाई, 2026 को आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई थी, जिसे बाद में 30 जुलाई, 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया। इस मार्ग पर अमौर, बैसा, रौटा, खटाहट और महीनगाँव सहित आठ नए रेलवे स्टेशन बनाए जाएंगे। यह मार्ग पूर्णिया जिले में जलालगढ़ जंक्शन से शुरू होकर किशनगंज मुख्यालय तक जाएगा।

यह रेल लाइन बिहार के सीमांचल क्षेत्र, जिसमें पूर्णिया और किशनगंज जैसे जिले शामिल हैं, के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। छोटे व्यवसायों (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम - MSMEs), ठेकेदारों और व्यापारियों के लिए, यह लाइन मक्का, जूट, अनानास और चाय पत्ती जैसे कृषि उत्पादों को बड़े राष्ट्रीय बाजारों तक आसानी से और सस्ते में पहुँचाने में मदद करेगी। इसका मतलब है कि वे अपने सामान को अधिक व्यापक और कुशलता से बेच सकते हैं। यह कटिहार और न्यू जलपाईगुड़ी के बीच चलने वाली ट्रेनों के लिए एक वैकल्पिक, छोटा मार्ग भी प्रदान करेगी, जिससे वर्तमान में व्यस्त मुकुरिया-किशनगंज खंड पर भीड़भाड़ (बहुत अधिक यातायात) कम होगी और यात्री व मालगाड़ियों (सामान ले जाने वाली ट्रेनें) दोनों के लिए परिचालन दक्षता (ट्रेनों के सुचारू और प्रभावी ढंग से चलने की क्षमता) में सुधार होगा।

रणनीतिक रूप से, यह लाइन संवेदनशील "चिकन नेक" गलियारे के समानांतर एक वैकल्पिक रेल लिंक प्रदान करेगी, जिससे आपात स्थिति के दौरान सुरक्षा बलों की आवाजाही में सहायता मिलेगी। स्थानीय जन प्रतिनिधियों, जिनमें पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव भी शामिल हैं, के लगातार प्रयासों का यह परिणाम है। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया अब आगे बढ़ने की उम्मीद है, हालांकि प्रभावित भूमि और मुआवजे के बारे में विशिष्ट विवरण अभी स्पष्ट नहीं किए गए हैं। मूल संरेखण में संभावित बदलाव को लेकर भी चर्चा हुई है, जिस पर स्थानीय प्रतिनिधियों ने घनी आबादी वाले वाणिज्यिक केंद्रों को लाभ पहुंचाने के लिए मूल मार्ग को बनाए रखने की चिंता व्यक्त की है।

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