भागलपुर में ₹5 करोड़ के विकास कार्य आचार संहिता के कारण रुके, ठेकेदारों को इंतजार

ThisNews Desk
भागलपुर में ₹5 करोड़ के विकास कार्य आचार संहिता के कारण रुके, ठेकेदारों को इंतजार
चित्र: Toàn BDS / Pexels

भागलपुर में लगभग 5 करोड़ रुपये के विकास कार्य आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct - MCC) के कारण ठप पड़ गए हैं, जिससे स्थानीय व्यवसायों और ठेकेदारों को भारी नुकसान हो रहा है। ये परियोजनाएँ कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद (MLC) चुनावों के लिए लागू आचार संहिता के चलते रुकी हुई हैं, जबकि इनके लिए निविदा प्रक्रिया (tendering process) पूरी हो चुकी थी। निविदा प्रक्रिया वह प्रक्रिया है जिसके तहत सरकार या नगर निगम किसी काम को करवाने के लिए कंपनियों से प्रस्ताव (बोली) मांगते हैं, और जो सबसे अच्छा प्रस्ताव देता है उसे काम मिलता है।

नगर निगम ने शहरी विकास एवं आवास विभाग से इन योजनाओं के लिए कार्य आदेश (work orders) और समझौते जारी करने में छूट देने का औपचारिक अनुरोध किया है। कार्य आदेश वह आधिकारिक दस्तावेज़ है जो ठेकेदार को काम शुरू करने की अनुमति देता है, और समझौता ठेकेदार व निगम के बीच काम की शर्तों को तय करने वाला कानूनी अनुबंध होता है। जिन प्रमुख कार्यों पर रोक लगी है उनमें कर्ण द्वार और ढेबर गेट का निर्माण शामिल है।

भागलपुर नगर निगम ने कुल लगभग 14.88 करोड़ रुपये की 33 योजनाओं के लिए निविदाएँ जारी की थीं। इनमें से, तकनीकी समस्याओं के कारण नौ योजनाओं के लिए फिर से निविदाएँ (re-tendering) जारी करनी पड़ीं, और चार निविदाएँ रद्द कर दी गईं। शेष 20 योजनाओं में से सात के लिए कार्य आदेश आचार संहिता लागू होने से पहले ही जारी कर दिए गए थे और उन पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। हालांकि, बाकी 13 महत्वपूर्ण योजनाएँ अधर में लटक गई हैं क्योंकि उनके कार्य आदेश और समझौते संसाधित नहीं हो पाए। इन रुकी हुई परियोजनाओं के लिए निविदा प्रक्रिया 23 जुलाई, 2026 को ही पूरी हो गई थी।

विलंबित परियोजनाओं में लोहपट्टी मुहाने से डिक्शन चौक तक नाले का निर्माण और दवापट्टी में एक पुलिया का निर्माण भी शामिल है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 49 लाख रुपये है और इसके लिए फिर से निविदा का प्रस्ताव है। भागलपुर नगर निगम, जिसकी अध्यक्षता महापौर डॉ. वसुंधरा लाल और नगर आयुक्त योगेश कुमार सागर कर रहे हैं, ने तर्क दिया है कि चूंकि निविदा निष्पादन आचार संहिता से पहले पूरा हो गया था, इसलिए अब केवल प्रशासनिक औपचारिकताएँ बची हैं। विशेष अनुमति मिलने से शहर के विकास में और बाधा नहीं आएगी।

इन परियोजनाओं के रुकने से स्थानीय व्यवसायों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और ठेकेदारों पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है, जो काम शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। MSMEs छोटे और मध्यम आकार के व्यवसाय होते हैं। इससे क्षेत्र में श्रमिकों और उद्यमियों के लिए संभावित रोजगार के अवसर भी बाधित हो रहे हैं। द्वार और जल निकासी प्रणालियों जैसे बुनियादी ढाँचे के विकास में यह देरी भागलपुर में स्थानीय वाणिज्य और दैनिक जीवन को भी प्रभावित कर सकती है।

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