बिहार में एक बड़े टेंडर घोटाले की जांच अब प्रधान सचिव और सचिव स्तर के अधिकारियों तक पहुंच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 27 अक्टूबर, 2026 तक सात आईएएस अधिकारियों को समन जारी किया है। यह घोटाला सरकारी टेंडरों में कथित हेरफेर और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, जिसका मुख्य सूत्रधार ठेकेदार ऋषु रंजन सिन्हा बताया जा रहा है।
टेंडर, आसान भाषा में, वह प्रक्रिया होती है जिसके तहत सरकार विभिन्न विकास कार्यों जैसे सड़क निर्माण, पुल बनाने या अन्य परियोजनाओं के लिए कंपनियों से प्रस्ताव मांगती है। जो कंपनी सबसे अच्छी शर्तों पर काम करने का प्रस्ताव देती है, उसे आमतौर पर ठेका मिलता है। टेंडर घोटाले में इस प्रक्रिया में अवैध तरीके से बदलाव किया जाता है, ताकि किसी खास कंपनी या व्यक्ति को फायदा पहुंचाया जा सके, अक्सर इसके बदले में रिश्वत ली जाती है। यह छोटे व्यवसायों और ईमानदार ठेकेदारों के लिए एक बड़ी चुनौती होती है, क्योंकि इससे उन्हें निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का मौका नहीं मिल पाता।
ईडी की जांच में सामने आया है कि इस घोटाले में सरकारी टेंडरों को प्रभावित करने के लिए बड़े पैमाने पर हेरफेर की गई। इसके साथ ही, अवैध रूप से कमाए गए धन को वैध दिखाने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग का भी सहारा लिया गया। मनी लॉन्ड्रिंग एक वित्तीय अपराध है जिसमें अवैध स्रोतों से प्राप्त धन को इस तरह से घुमाया जाता है कि वह वैध प्रतीत हो। यह आमतौर पर कई जटिल लेनदेन के माध्यम से किया जाता है ताकि पैसे के असली स्रोत को छिपाया जा सके और उसे अर्थव्यवस्था में फिर से शामिल किया जा सके।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है और अब इसमें राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हो गए हैं। जिन सात आईएएस अधिकारियों को समन जारी किया गया है, वे प्रधान सचिव और सचिव स्तर के हैं, जो राज्य प्रशासन में महत्वपूर्ण पदों पर होते हैं। ईडी इन अधिकारियों से घोटाले में उनकी कथित भूमिका और ठेकेदार ऋषु रंजन सिन्हा के साथ उनके संबंधों को लेकर पूछताछ करेगी। इस घटनाक्रम से बिहार के व्यापारिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई है, क्योंकि यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई अब उच्च स्तर तक पहुंच रही है। यह उन सभी छोटे व्यवसायों, ठेकेदारों और उद्यमियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है जो सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता की उम्मीद करते हैं। इस तरह के घोटाले न केवल सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि राज्य के विकास को भी बाधित करते हैं और व्यापारिक माहौल में विश्वास को कम करते हैं।
