जमुई जिले में बहुप्रतीक्षित झाझा-बटिया नई रेल लाइन परियोजना अब निर्माण के करीब है। इस महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना के लिए निविदा प्रक्रिया जारी है, और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। यह परियोजना बिहार के छोटे व्यवसायों, ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं के लिए नए अवसर पैदा करेगी।
यह परियोजना इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल पर आधारित है। EPC का मतलब है कि ठेकेदार को इंजीनियरिंग डिजाइन से लेकर सामग्री की खरीद और निर्माण तक, परियोजना के सभी पहलुओं की जिम्मेदारी लेनी होगी। यह एक ब्रॉड गेज (BG) लाइन होगी, जिसकी लंबाई 20.650 रूट किलोमीटर (27.888 ट्रैक किलोमीटर) है। यह लाइन झाझा (1.350 किमी से शुरू) को छोड़कर बटिया स्टेशन (22.000 किमी तक) तक फैलेगी।
इस कार्य में मिट्टी का काम, ब्लैंकेटिंग, छोटे और बड़े पुलों का निर्माण, एलएचएस (लिमिटेड हाइट सबवे)/आरयूबी (रोड अंडर ब्रिज), आरओबी (रेलवे ओवर ब्रिज), ट्रैक बिछाना, प्लेटफॉर्म का निर्माण, स्टेशन भवन, फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) और भारतीय रेलवे के 25T मानक लोडिंग के लिए डिज़ाइन किए गए अन्य संबंधित कार्य शामिल हैं।
इस परियोजना की देखरेख भारतीय रेलवे, विशेष रूप से पूर्व मध्य रेलवे (ECR) और रेल मंत्रालय द्वारा की जा रही है। इस लगभग 20 किलोमीटर लंबी लाइन की आधारशिला 2 मार्च, 2019 को तत्कालीन केंद्रीय रेल और कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने रखी थी, जिसमें स्थानीय सांसद और वर्तमान केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। नई लाइन पर सोनो और बटिया में दो स्टेशन बनाए जाएंगे।
सक्रिय ईपीसी निविदा का अनुमानित अनुबंध मूल्य ₹439.98 करोड़ है। झाझा-बटिया नई लाइन परियोजना की कुल अनुमानित लागत शुरू में ₹496.37 करोड़ थी, हालांकि एक अन्य स्रोत ₹588.18 करोड़ का "टिकट साइज" बताता है। भूमि अधिग्रहण के लिए लगभग ₹205 करोड़ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आवंटित किया गया है।
निर्माण कार्य के लिए आधिकारिक निविदा 14 अक्टूबर, 2026 को प्रकाशित की गई थी और वर्तमान में सक्रिय है। बोलियां जमा करने की अंतिम तिथि 11 फरवरी, 2027 निर्धारित की गई है। यह परियोजना क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति देने और कनेक्टिविटी में सुधार करने में सहायक होगी।
