बिहार में डस्टबिन खरीद घोटाला: सरकारी खरीद में अनियमितताओं के आरोप

ThisNews Desk
बिहार में डस्टबिन खरीद घोटाला: सरकारी खरीद में अनियमितताओं के आरोप
चित्र: CK Seng / Pexels

बिहार में मेडिकल कचरा प्रबंधन उपकरण की खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप सामने आया है, जिसे "बिहार डस्टबिन घोटाला" कहा जा रहा है। यह मामला अगस्त और सितंबर 2026 में सुर्खियों में आया।

बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMSICL) ने 2023 में माइक्रोवेव-आधारित मेडिकल कचरा स्टरलाइजेशन इकाइयों, बायोडिग्रेडेबल बैग और मास्टर बिन की खरीद के लिए एक निविदा (टेंडर) जारी की थी। निविदा सरकारी खरीद के लिए व्यवसायों को आमंत्रित करने की एक औपचारिक प्रक्रिया है। इस खरीद प्रक्रिया का कुल बजट 305.53 करोड़ रुपये था।

आरोप है कि जमीन पर केवल 29.05 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि 276.38 करोड़ रुपये से अधिक का गबन (अवैध रूप से धन का हस्तांतरण) कर लिया गया। उदाहरण के तौर पर, 75-लीटर प्लास्टिक डस्टबिन (बाजार कीमत 1,000-1,500 रुपये) 15,490 रुपये में खरीदे गए। इसी तरह, 45-लीटर डस्टबिन (बाजार कीमत 700 रुपये) 11,000 रुपये में और बायोडिग्रेडेबल बैग (बाजार कीमत 7-9 रुपये) 109 रुपये प्रति बैग में खरीदे गए। इस कथित घोटाले की राशि 300 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है, कुछ विपक्षी आंकड़े इसे लगभग 700 करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा कर रहे हैं।

इस मामले में BMSICL प्राथमिक सरकारी एजेंसी है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने पूर्व राज्य स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे, तत्कालीन विकास आयुक्त और BMSICL अधिकारियों पर आरोप लगाए हैं। आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने उच्च न्यायालय में उच्च-स्तरीय जांच की मांग करने का इरादा व्यक्त किया है। हालांकि, BMSICL के गुमनाम कर्मचारियों ने खरीद का बचाव करते हुए कहा है कि ये डस्टबिन विशेष, उच्च तापमान और गर्मी प्रतिरोधी प्लास्टिक कंटेनर हैं, और कीमतें तकनीकी विशिष्टताओं, निविदा शर्तों, ऑर्डर की मात्रा, परिवहन, स्थापना और करों को दर्शाती हैं।

यह आरोप अगस्त और सितंबर 2026 में सामने आए हैं। मौजूदा एनडीए सरकार, जिसका नेतृत्व सम्राट चौधरी कर रहे हैं, ने 15 अप्रैल 2026 को कार्यभार संभाला था। राज्य सरकार ने अभी तक इस कथित डस्टबिन घोटाले पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया है।

यह कथित घोटाला बिहार में सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर चिंताएं पैदा करता है। सार्वजनिक धन (सरकार द्वारा एकत्र किया गया धन) के दुरुपयोग से विकास परियोजनाओं, स्थानीय व्यवसायों और रोजगार सृजन के लिए उपलब्ध संसाधन कम हो जाते हैं। ऐसी अनियमितताएं सरकारी संस्थानों में जनता के विश्वास को कम कर सकती हैं और ईमानदार व्यवसायों को निविदाओं में भाग लेने से हतोत्साहित कर सकती हैं, जिससे राज्य के समग्र आर्थिक माहौल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

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