बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के बाराचकिया स्थित एसआरएपी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राम नरेश पंडित को ₹2 करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू) प्रशासन ने यह कार्रवाई की है, जिसके तहत एसआरएपी कॉलेज संचालित होता है। विश्वविद्यालय के कुलपति के निर्देश पर रजिस्ट्रार प्रो. समीर कुमार शर्मा ने 21 सितंबर, 2026 को निलंबन की आधिकारिक अधिसूचना जारी की।
विश्वविद्यालय के वित्तीय सलाहकार की अध्यक्षता में गठित एक समिति ने जांच के दौरान कई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा किया। इनमें कॉलेज द्वारा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) खाता न खोलना शामिल है, जिसके कारण सरकार को 18% जीएसटी का नुकसान हुआ। जीएसटी एक ऐसा कर है जो वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री पर लगता है, और इसका भुगतान व्यवसायों द्वारा सरकार को किया जाता है। खाता न होने से यह राजस्व सरकार तक नहीं पहुंच पाया।
जांच में निविदा प्रक्रिया (टेंडर) में भी गंभीर धांधली पाई गई। निविदा प्रक्रिया वह तरीका है जिसमें सरकारी या बड़ी संस्थाएं किसी काम के लिए विभिन्न कंपनियों से प्रस्ताव (बोली) मांगती हैं, ताकि सबसे उपयुक्त और किफायती विकल्प चुना जा सके। यहां, सीलबंद कोटेशन के बावजूद कार्य आदेश जारी कर दिए गए और काम पूरा भी कर लिया गया, जो पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के नियमों का उल्लंघन है। इसके अतिरिक्त, खरीद और नियुक्तियों में भी अनियमितताएं सामने आई हैं।
यह घटना बिहार के व्यवसायों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), व्यापारियों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसी कार्रवाई निविदा प्रक्रियाओं में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती है और भ्रष्टाचार को रोकती है। वित्तीय कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार से सार्वजनिक संस्थानों में विश्वास कम होता है और उन निधियों का दुरुपयोग होता है जिन्हें विकास परियोजनाओं या सार्वजनिक सेवाओं में निवेश किया जा सकता था। जीएसटी जैसे करों का संग्रह न होने से सरकारी राजस्व में कमी आती है, जिससे आवश्यक सेवाओं और बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण की राज्य की क्षमता प्रभावित होती है।
डॉ. पंडित ने इन आरोपों को मनगढ़ंत और एक साजिश का हिस्सा बताया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका कार्यालय एलएनडी कॉलेज, मोतिहारी में निर्धारित किया गया है, जबकि एसआरएपी कॉलेज का प्रभार एसएनएस कॉलेज, मोतिहारी के प्राचार्य डॉ. विनोद बैठा को सौंपा गया है। विभागीय कार्यवाही भी शुरू कर दी गई है। जीवछ कॉलेज पर भी इसी तरह की लगभग ₹2 करोड़ की अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।
