बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने सहरसा नगर निगम के आयुक्त प्रभात कुमार झा को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई विकास परियोजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद की गई है। निलंबन की घोषणा 3 नवंबर, 2026 को की गई। यह मामला सहरसा नगर निगम में कुल 8.44 करोड़ रुपये की चार प्रमुख विकास परियोजनाओं से जुड़ा है।
प्रभात कुमार झा पर मुख्य आरोप यह है कि इन चार बड़ी परियोजनाओं को जानबूझकर 68 छोटी योजनाओं में विभाजित किया गया था। यह कदम कथित तौर पर अनिवार्य ई-टेंडरिंग प्रक्रिया से बचने के लिए उठाया गया था। व्यवसायियों और ठेकेदारों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि ई-टेंडरिंग एक ऑनलाइन प्रक्रिया है जिसके तहत सरकार या सरकारी संस्थाएं ठेकेदारों से काम करवाने के लिए बोलियां (निविदाएं) आमंत्रित करती हैं। 15 लाख रुपये से अधिक के किसी भी प्रोजेक्ट के लिए यह प्रक्रिया अनिवार्य है। इसका मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना, भ्रष्टाचार को रोकना और सभी योग्य ठेकेदारों को समान अवसर प्रदान करना है, चाहे वे छोटे हों या बड़े। परियोजनाओं को छोटे टुकड़ों में बांटकर, 15 लाख रुपये की ई-टेंडरिंग सीमा से नीचे रखा गया, जिससे ऑनलाइन बोली प्रक्रिया को दरकिनार किया जा सके। इससे प्रतिस्पर्धा कम होती है और छोटे तथा मध्यम वर्ग के ठेकेदारों को अक्सर उचित मौका नहीं मिल पाता।
यह जांच पूर्व मंत्री और भाजपा नेता आलोक रंजन की शिकायत के बाद शुरू हुई थी। शहरी विकास एवं आवास विभाग की पांच सदस्यीय समिति ने इस मामले की जांच की। समिति ने 20 से 22 अगस्त, 2026 के बीच साइटों का निरीक्षण किया और दस्तावेजों की समीक्षा की। अपनी रिपोर्ट 21 सितंबर, 2026 को प्रस्तुत की, जिसमें अनियमितताओं की पुष्टि की गई और झा के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई।
निलंबन की अवधि के दौरान, प्रभात कुमार झा का मुख्यालय मगध प्रमंडल, गया स्थित आयुक्त कार्यालय में निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्राप्त होगा। इस घटनाक्रम से बिहार में सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता उजागर होती है, जो ठेकेदारों और उद्यमियों के लिए एक स्वस्थ व्यावसायिक माहौल के लिए महत्वपूर्ण है।
