बिहार के बहु-करोड़ टेंडर घोटाले में ED की जाँच तेज़, पटना हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद मिली गति

ThisNews Desk
बिहार के बहु-करोड़ टेंडर घोटाले में ED की जाँच तेज़, पटना हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद मिली गति — प्रतीकात्मक तस्वीर
चित्र: Hadinata Wijaya / Pexels

प्रवर्तन निदेशालय (ED) बिहार में एक बहु-करोड़ टेंडर घोटाले की जाँच को तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है। इस मामले में कई वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी भी जाँच के दायरे में हैं। यह जाँच तब और महत्वपूर्ण हो गई जब 15 अक्टूबर, 2026 को पटना उच्च न्यायालय ने मामले की धीमी गति पर सवाल उठाए थे।

टेंडर घोटाला एक ऐसी स्थिति को दर्शाता है जहाँ सरकारी परियोजनाओं या खरीद के लिए बोली प्रक्रिया (टेंडर) में धांधली की जाती है। सरल शब्दों में, जब सरकार किसी सड़क निर्माण, पुल बनाने या किसी सामान की आपूर्ति जैसे काम के लिए विभिन्न कंपनियों (ठेकेदारों) से प्रस्ताव (बोली) आमंत्रित करती है, तो उसे टेंडर कहते हैं। एक टेंडर घोटाले में, यह प्रक्रिया बेईमानी से प्रभावित की जाती है ताकि एक विशेष कंपनी को अनुचित तरीके से ठेका मिल सके। इससे ईमानदार छोटे व्यवसायों और ठेकेदारों को निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का अवसर नहीं मिल पाता और अक्सर जनता के पैसे का दुरुपयोग होता है।

ED की यह गहन जाँच बिहार के आर्थिक परिदृश्य के लिए महत्वपूर्ण है। इस घोटाले में कथित तौर पर कई वरिष्ठ IAS अधिकारी शामिल हैं, जो सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है। ऐसे घोटालों से न केवल सरकारी खजाने को नुकसान होता है, बल्कि यह उन छोटे और मध्यम व्यवसायों (MSMEs) के लिए भी बाधा बन जाता है जो ईमानदारी से काम करना चाहते हैं।

पटना उच्च न्यायालय ने 15 अक्टूबर, 2026 को इस मामले की सुनवाई के दौरान जाँच की सुस्त रफ्तार पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। न्यायालय ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ठेकेदार ऋषु श्री (Rishu Shree) केवल एक "p" था। न्यायालय की इन टिप्पणियों के बाद, ED ने अपनी जाँच में नई गति लाई है। इस जाँच का उद्देश्य घोटाले में शामिल सभी व्यक्तियों और संस्थाओं की पहचान करना और उन्हें कानून के कटघरे में लाना है।

यह मामला बिहार में सरकारी ठेकों की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार को खत्म करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। छोटे व्यवसायियों और ठेकेदारों के लिए यह समझना ज़रूरी है कि ऐसे घोटालों से कैसे बचा जाए और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के लिए आवाज़ उठाई जाए।

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