बिहार के खनिज संसाधनों के पारदर्शी उपयोग पर केंद्र-राज्य बैठक, पीरपैंती कोयला ब्लॉक पर विशेष ध्यान

ThisNews Desk
बिहार के खनिज संसाधनों के पारदर्शी उपयोग पर केंद्र-राज्य बैठक, पीरपैंती कोयला ब्लॉक पर विशेष ध्यान
चित्र: Usame Dzinovic / Pexels

10 सितंबर, 2026 को केंद्र सरकार और बिहार सरकार के बीच एक उच्च-स्तरीय बैठक हुई, जिसमें बिहार के खनिज संसाधनों के पारदर्शी और वैज्ञानिक उपयोग पर गहन चर्चा की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य के प्राकृतिक धन का कुशलतापूर्वक और जिम्मेदारी से प्रबंधन सुनिश्चित करना था, ताकि इसका लाभ राज्य की अर्थव्यवस्था और नागरिकों को मिल सके।

बैठक के दौरान, बिहार के खान एवं भूविज्ञान मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने विशेष रूप से पीरपैंती कोयला ब्लॉक पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पीरपैंती में भूमिगत खनन (underground mining) की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

व्यवसायियों और ठेकेदारों के लिए इन शर्तों को समझना महत्वपूर्ण है। खनिज संसाधन वे मूल्यवान प्राकृतिक पदार्थ हैं जो पृथ्वी से निकाले जाते हैं, जैसे कोयला, लौह अयस्क, और चूना पत्थर। ये उद्योग, ऊर्जा उत्पादन और निर्माण के लिए आवश्यक कच्चे माल होते हैं। पारदर्शी और वैज्ञानिक उपयोग का अर्थ है कि इन संसाधनों का निष्कर्षण और बिक्री पूरी तरह से साफ-सुथरे तरीके से हो, जिसमें कोई भ्रष्टाचार न हो, और पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो। वैज्ञानिक उपयोग यह सुनिश्चित करता है कि नवीनतम तकनीकों और विशेषज्ञता का उपयोग करके संसाधनों को कुशलता से निकाला जाए, जिससे बर्बादी कम हो।

भूमिगत खनन एक ऐसी विधि है जहाँ खनिक जमीन के नीचे सुरंगें खोदकर खनिज निकालते हैं। यह अक्सर तब किया जाता है जब खनिज सतह के बहुत नीचे होते हैं। खुले गड्ढे वाले खनन (open-pit mining) की तुलना में यह अधिक जटिल और महंगा हो सकता है, लेकिन इसका पर्यावरण पर कम दृश्य प्रभाव पड़ता है और यह सतह के उपयोग को प्रभावित नहीं करता।

पीरपैंती जैसे कोयला ब्लॉकों का विकास बिहार की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देगा, जो उद्योगों के लिए एक स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायक होगा। खनिज संसाधनों के उचित और टिकाऊ उपयोग से राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी, जिससे विकास परियोजनाओं के लिए धन उपलब्ध होगा। यह खनन क्षेत्र में ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं और श्रमिकों के लिए नए व्यावसायिक अवसर भी पैदा करेगा, खासकर उन लोगों के लिए जो विशेष उपकरण या खनन सेवाओं में विशेषज्ञता रखते हैं। भूमिगत खनन पर जोर देना यह भी दर्शाता है कि सरकार पर्यावरण-अनुकूल और दीर्घकालिक खनन प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, जो भविष्य के निवेश और व्यावसायिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। यह बैठक बिहार के खनिज क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो राज्य के प्राकृतिक धन के जिम्मेदार और प्रभावी प्रबंधन की दिशा में एक स्पष्ट संकेत देता है।

इंफ्रास्ट्रक्चर में और पढ़ें