सोनपुर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे की डीपीआर एक माह में अपेक्षित, निर्माण 2027 में शुरू होने की संभावना

ThisNews Desk
सोनपुर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे की डीपीआर एक माह में अपेक्षित, निर्माण 2027 में शुरू होने की संभावना
चित्र: Lucas Pezeta / Pexels

बिहार के सारण जिले में सोनपुर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) एक महीने के भीतर पूरी होने की उम्मीद है। यह बिहार के व्यापारिक समुदाय, ठेकेदारों, आपूर्तिकर्ताओं और उद्यमियों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर है, क्योंकि इस रिपोर्ट के पूरा होने के बाद 2027 में सिविल निर्माण कार्य शुरू होने की प्रबल संभावना है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का लक्ष्य 2030 से पहले हवाई अड्डे को पूरी तरह से चालू करना है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में 2026 की शुरुआत में हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में इस ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के निर्माण को हरी झंडी दी गई थी। 'ग्रीनफील्ड' शब्द का अर्थ है कि यह हवाई अड्डा बिल्कुल नई, अविकसित भूमि पर बनाया जाएगा, न कि किसी मौजूदा हवाई अड्डे के विस्तार के रूप में। यह दृष्टिकोण बड़े पैमाने पर योजना और आधुनिक सुविधाओं के समावेश की अनुमति देता है। यह परियोजना अगले छह दशकों के लिए बिहार की अनुमानित विमानन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक दीर्घकालिक और भविष्योन्मुखी सुविधा के रूप में परिकल्पित है। यह राज्य की बढ़ती आर्थिक गतिविधियों और व्यापारिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

यह विशाल हवाई अड्डा लगभग 4,228 एकड़ भूमि में फैला होगा, जो दरियापुर चनवर क्षेत्र में, हाजीपुर और डुमरिया के बीच स्थित है। 'विस्तृत परियोजना रिपोर्ट' (DPR) किसी भी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना की नींव होती है। यह एक व्यापक दस्तावेज होता है जो परियोजना के तकनीकी व्यवहार्यता, वित्तीय अनुमानों, पर्यावरणीय प्रभावों और सामाजिक पहलुओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत करता है। इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट का पूरा होना निर्माण कार्य शुरू करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

सोनपुर हवाई अड्डे में दो रनवे होंगे जो एयरबस ए380 जैसे बड़े विमानों (वाइड-बॉडी एयरक्राफ्ट) को आसानी से संभालने में सक्षम होंगे। 'वाइड-बॉडी एयरक्राफ्ट' वे बड़े विमान होते हैं जो लंबी दूरी की उड़ानों के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं और अधिक यात्रियों तथा भारी मात्रा में कार्गो ले जा सकते हैं। इस क्षमता का मतलब है कि यह हवाई अड्डा न केवल घरेलू बल्कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और बड़े पैमाने पर कार्गो आवाजाही को भी सुविधाजनक बना सकता है, जिससे बिहार के व्यापारियों, निर्यातकों और आयातकों को सीधा लाभ मिलेगा।

यह परियोजना निर्माण क्षेत्र में लगे ठेकेदारों, सामग्री आपूर्तिकर्ताओं, इंजीनियरों और विभिन्न प्रकार के श्रमिकों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगी। एक बार चालू होने के बाद, यह हवाई अड्डा व्यापार, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और समग्र कनेक्टिविटी को अभूतपूर्व बढ़ावा देगा, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और छोटे व्यवसायों के लिए निवेश तथा विकास के नए रास्ते खुलेंगे। यह बिहार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विमानन मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।

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