बिहार सरकार ने राज्य में गन्ना उद्योग को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने के लिए "गन्ना उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति 2026" की शुरुआत की है। इस व्यापक पहल का उद्देश्य चीनी मिलों, इथेनॉल, सह-उत्पादन (cogeneration) और संपीड़ित बायोगैस (CBG) परियोजनाओं में निवेश को प्रोत्साहित करना है। बिहार के संयुक्त गन्ना आयुक्त, वेदव्रत कुमार ने 9 और 10 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) सम्मेलन में इस नीति की घोषणा की। गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इस नीति के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला है।
इस नीति के तहत, राज्य सरकार का लक्ष्य बिहार भर में 25 नई चीनी मिलें और सहायक इकाइयाँ स्थापित करना है, साथ ही बंद पड़ी मिलों को पुनर्जीवित करना भी है। निवेशकों को महत्वपूर्ण प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं, जिनमें 1 रुपये के टोकन शुल्क पर 30 साल के पट्टे पर 40 एकड़ तक की सरकारी भूमि उपलब्ध कराना शामिल है। इसके अतिरिक्त, भूमि खरीद के लिए पंजीकरण और स्टांप शुल्क शुल्कों की 100% प्रतिपूर्ति और चीनी उत्पादन पर पांच साल के लिए राज्य वस्तु एवं सेवा कर (SGST) की पूर्ण प्रतिपूर्ति प्रदान की जाएगी। SGST वह कर है जो राज्य सरकार द्वारा वस्तुओं और सेवाओं पर लगाया जाता है।
सरकार नई चीनी मिलों के लिए पूंजीगत अनुदान (capital grants) भी प्रदान कर रही है। 5,000 टन गन्ना प्रतिदिन (TCD) की पेराई क्षमता वाली नई चीनी मिलों को 100 करोड़ रुपये तक और 3,500 TCD क्षमता वाली मिलों को 70 करोड़ रुपये तक का पूंजीगत अनुदान मिलेगा। TCD का अर्थ है 'टन गन्ना प्रतिदिन', जो मिल की गन्ना पेराई क्षमता को दर्शाता है। मौजूदा मिलें जो अपनी क्षमता में कम से कम 1,000 TCD की वृद्धि करती हैं, उन्हें 15 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।
डिस्टिलरी और इथेनॉल इकाइयों के लिए, जिनकी न्यूनतम क्षमता 45 किलोलीटर प्रतिदिन (KLPD) है, निश्चित पूंजी निवेश का 15% पूंजीगत अनुदान के रूप में उपलब्ध होगा, जिसकी अधिकतम सीमा 5 करोड़ रुपये है। KLPD का अर्थ है 'किलोलीटर प्रतिदिन', जो तरल उत्पादों के उत्पादन की क्षमता को दर्शाता है। चीनी मिलों से जुड़े कम से कम 10 मेगावाट के सह-उत्पादन बिजली संयंत्र (cogeneration power plants) 20% अनुदान के लिए पात्र हैं, जिसकी अधिकतम सीमा 15 करोड़ रुपये है। सह-उत्पादन का अर्थ है एक ही ईंधन स्रोत (जैसे गन्ने का कचरा) से बिजली और गर्मी दोनों का उत्पादन करना।
इसके अलावा, न्यूनतम 5 टन प्रतिदिन क्षमता वाले CBG संयंत्र (compressed biogas plants) निश्चित पूंजी निवेश पर 15% अनुदान प्राप्त कर सकते हैं, जिसकी अधिकतम सीमा 5 करोड़ रुपये है। CBG एक प्रकार की बायोगैस है जिसे ईंधन के रूप में उपयोग के लिए संपीड़ित किया जाता है। विशिष्ट श्रेणियों की महिला उद्यमियों के लिए सब्सिडी में वृद्धि की गई है।
यह नीति बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और गन्ना किसानों व श्रमिकों की आजीविका का समर्थन करने के लिए महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा करना और पलायन को कम करना है। यह पहल चीनी मिलों को डिस्टिलरी और अन्य इकाइयों के साथ एकीकृत करने वाले "आधुनिक चीनी परिसर" मॉडल को बढ़ावा देती है।
