बिहार में 12 सैटेलाइट टाउनशिप विकसित होंगी, पहले चरण में पाटलिपुत्र और हरिहरनाथपुरम पर काम तेज

ThisNews Desk(अपडेट: 12 अगस्त 2026 को 2:00 pm बजे)
बिहार में 12 सैटेलाइट टाउनशिप विकसित होंगी, पहले चरण में पाटलिपुत्र और हरिहरनाथपुरम पर काम तेज
चित्र: Pok Rie / Pexels

बिहार सरकार राज्य भर में 12 नए ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित कर रही है, जिसका उद्देश्य शहरी विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। यह पहल छोटे व्यवसाय मालिकों, ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए नए और व्यापक अवसर पैदा करेगी। ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप का सरल अर्थ यह है कि ये शहर बिल्कुल नए सिरे से बनाए जाएंगे, अक्सर मौजूदा शहरों के पास, ताकि उन पर आबादी का दबाव कम हो सके और नए, सुनियोजित व्यापारिक तथा आवासीय केंद्र विकसित हो सकें।

इस महत्वपूर्ण परियोजना को 3 जुलाई, 2026 को हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (हुडको) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर के बाद काफी गति मिली है। इस MoU के तहत, हुडको इन परियोजनाओं के लिए ₹1 लाख करोड़ का दीर्घकालिक वित्तपोषण प्रदान करेगा। दीर्घकालिक वित्तपोषण का मतलब है कि यह एक ऐसा ऋण है जो लंबी अवधि के लिए दिया जाता है, जिससे सरकार को बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को बिना तत्काल वित्तीय दबाव के पूरा करने में मदद मिलती है। यह राशि इन टाउनशिप के निर्माण और विकास के लिए आवश्यक पूंजी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।

राज्य सरकार का लक्ष्य इन परियोजनाओं के लिए निजी और संस्थागत निवेश के रूप में अतिरिक्त ₹6 लाख करोड़ आकर्षित करना भी है। निजी निवेश का अर्थ है कि विभिन्न कंपनियां और व्यक्ति इन परियोजनाओं में अपना पैसा लगाएंगे, जबकि संस्थागत निवेश का मतलब है कि बड़े वित्तीय संस्थान, जैसे बैंक, बीमा कंपनियां या निवेश फंड, इसमें पूंजी लगाएंगे। यह बाहरी निवेश परियोजना को और मजबूत करेगा और इसकी सफलता सुनिश्चित करेगा।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में मंत्रिमंडल ने 22 अप्रैल, 2026 को इस योजना को औपचारिक रूप से मंजूरी दी थी। शुरुआत में, अनियोजित और बेतरतीब विकास को रोकने के लिए, पहचाने गए क्षेत्रों में भूमि की बिक्री, हस्तांतरण, विकास और निर्माण गतिविधियों पर एक अस्थायी प्रतिबंध लगाया गया था। हालांकि, यह व्यापक प्रतिबंध 20 जून को हटा लिया गया था, जिससे विकास कार्य आगे बढ़ सके और योजनाबद्ध तरीके से निर्माण शुरू हो सके।

इन नई टाउनशिप के विकास से न केवल बिहार में आवास की बढ़ती समस्या का समाधान होगा, बल्कि यह व्यापार और उद्योग के लिए भी नए रास्ते खोलेगा। ठेकेदारों को बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य मिलेंगे, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। छोटे व्यवसायों को नए बाजारों और ग्राहकों तक पहुंच मिलेगी, क्योंकि ये टाउनशिप नई आबादी को आकर्षित करेंगी। उद्यमियों को इन नए शहरी केंद्रों में विभिन्न सेवाओं और उत्पादों की मांग को पूरा करने के लिए नए व्यापार स्थापित करने के अवसर मिलेंगे। यह पहल बिहार के शहरी परिदृश्य को बदलने और उसकी अर्थव्यवस्था को एक नई गति प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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