भागलपुर नगर निगम में 11 करोड़ के टेंडर विवाद का समाधान, पार्षदों ने आपसी सहमति से सुलझाया मुद्दा

ThisNews Desk
भागलपुर नगर निगम में 11 करोड़ के टेंडर विवाद का समाधान, पार्षदों ने आपसी सहमति से सुलझाया मुद्दा
चित्र: Laura Paredis / Pexels

भागलपुर नगर निगम में 11 करोड़ रुपये के विकास परियोजनाओं से जुड़े टेंडर को लेकर चल रहा विवाद आखिरकार सुलझ गया है। 2 सितंबर, 2026 को मेयर कार्यालय में हुई बैठक में नगर पार्षदों ने आपसी सहमति से इस महत्वपूर्ण मुद्दे का समाधान निकाला। यह समझौता भविष्य में टेंडर प्रक्रियाओं से संबंधित किसी भी मतभेद को सामूहिक और लोकतांत्रिक तरीके से हल करने की दिशा में एक मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिससे नगर निगम के कामकाज में अधिक पारदर्शिता और सहयोग की उम्मीद है।

यह सकारात्मक परिणाम नगर निगम के भीतर काफी तनाव और असहमति के दौर के बाद आया है। अगस्त 2026 के मध्य से ही कई पार्षदों ने विकास परियोजनाओं के आवंटन के तरीके पर गंभीर आपत्तियां उठाई थीं, जिससे निगम के कामकाज में गतिरोध पैदा हो गया था।

पार्षदों ने विशेष रूप से 11 करोड़ रुपये के एक बड़े टेंडर को रद्द करने की मांग की थी। उनका आरोप था कि इस टेंडर का वितरण अनुचित तरीके से किया गया है, जिसमें 51 में से केवल 29 वार्डों को ही लाभ पहुंचाया गया, जबकि शेष 22 वार्डों की पूरी तरह से उपेक्षा की गई। इन आरोपों के चलते मेयर और डिप्टी मेयर पर संसाधनों के वितरण में भेदभावपूर्ण व्यवहार का आरोप भी लगाया गया था, जिससे निगम के भीतर राजनीतिक माहौल गरमा गया था।

छोटे व्यवसायों, ठेकेदारों और उद्यमियों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि 'टेंडर' या 'निविदा' क्या होती है। यह एक औपचारिक प्रक्रिया है जिसमें कोई सरकारी विभाग या संस्था (जैसे नगर निगम) किसी विशेष काम (जैसे सड़क निर्माण, सफाई या अन्य विकास कार्य) को करवाने के लिए अलग-अलग कंपनियों या व्यक्तियों से प्रस्ताव आमंत्रित करती है। जो कंपनी या व्यक्ति सबसे अच्छी शर्तों पर और निर्धारित मानकों के अनुसार काम करने का प्रस्ताव देता है, उसे वह काम सौंपा जाता है।

इस विवाद के सुलझने से भागलपुर में विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। यह सुनिश्चित करेगा कि नगर निगम द्वारा आवंटित परियोजनाएं सभी वार्डों में समान रूप से वितरित हों, जिससे स्थानीय ठेकेदारों और श्रमिकों को भी काम के अधिक अवसर मिलेंगे। यह समाधान न केवल निगम के भीतर सौहार्दपूर्ण माहौल बहाल करेगा बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि सार्वजनिक धन का उपयोग सभी नागरिकों के लाभ के लिए न्यायसंगत तरीके से हो। यह छोटे व्यवसाय मालिकों और ठेकेदारों के लिए एक सकारात्मक संकेत है कि उनकी चिंताओं को सुना जा रहा है और प्रक्रियाओं में निष्पक्षता लाई जा रही है।

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