बिहार के ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलू मंडल ने 10 सितंबर, 2026 को आयोजित 19वें पर्यावरण एवं ऊर्जा कॉन्क्लेव में राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को उसकी आत्मनिर्भरता का आधार बताया है। उन्होंने इस महत्वपूर्ण अवसर पर निवेशकों को बिहार के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने के लिए आमंत्रित भी किया।
छोटे व्यवसायियों, ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए ऊर्जा सुरक्षा का अर्थ है बिजली और ईंधन की विश्वसनीय और सस्ती आपूर्ति सुनिश्चित करना। कल्पना कीजिए कि एक छोटी वर्कशॉप को अपनी मशीनें चलाने के लिए लगातार बिजली की आवश्यकता होती है, या एक दुकान को रोशनी और पंखे के लिए। यदि बिजली बार-बार कटती है या बहुत महंगी हो जाती है, तो यह सीधे उनके संचालन, उत्पादन क्षमता और ग्राहकों को सेवा देने की क्षमता को प्रभावित करता है। ऊर्जा सुरक्षा का लक्ष्य ऐसी बाधाओं को दूर करना है, जिससे व्यवसाय सुचारु और अनुमानित रूप से काम कर सकें। यह न केवल दैनिक कामकाज के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि आर्थिक विकास और जीवन की गुणवत्ता के लिए भी आवश्यक है।
मंत्री ने जोर देकर कहा कि बिहार की ऊर्जा सुरक्षा ही उसकी आत्मनिर्भरता की नींव है। आत्मनिर्भरता का अर्थ है कि राज्य अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बाहरी स्रोतों पर अत्यधिक निर्भरता के बजाय, अपनी स्वयं की ऊर्जा उत्पन्न करने में सक्षम हो। यह बाहरी राज्यों से बिजली खरीदने पर निर्भरता को कम करता है, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव या आपूर्ति में कटौती की भेद्यता कम होती है। एक आत्मनिर्भर ऊर्जा क्षेत्र राज्य के भीतर अधिक स्थिर ऊर्जा मूल्य और दीर्घकालिक विश्वसनीयता सुनिश्चित करता है, जो स्थानीय निवेश और विस्तार को प्रोत्साहित करता है।
निवेशकों को दिया गया यह आमंत्रण बिहार के ऊर्जा क्षेत्र में नए अवसरों का संकेत देता है। इसका मतलब है कि बिजली उत्पादन (जैसे सौर ऊर्जा संयंत्र, पनबिजली परियोजनाएं), पारेषण (बिजली पहुंचाने वाले नेटवर्क) और वितरण (घरों और व्यवसायों तक बिजली पहुंचाना) में नए प्रोजेक्ट आ सकते हैं। ठेकेदारों के लिए, इसका अर्थ नए बिजली संयंत्रों के निर्माण या मौजूदा बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लिए संभावित परियोजनाएं हो सकती हैं। आपूर्तिकर्ताओं के लिए, यह सामग्री और उपकरण की मांग पैदा करेगा। उद्यमियों के लिए, ऊर्जा सेवाओं या नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों से संबंधित नए उद्यम शुरू करने के अवसर खुल सकते हैं। यह घोषणा राज्य द्वारा की गई महत्वपूर्ण घोषणाओं और नीतिगत पहलों की एक श्रृंखला का हिस्सा है, जो बिहार के आर्थिक विकास को गति देने के लिए प्रतिबद्धता दर्शाती है।
