बिहार हरित ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है, जिसके तहत राज्य के उच्च शिक्षा संस्थानों में विशेष ग्रीन एनर्जी कोर्स शुरू किए जाएंगे। यह पहल छोटे व्यवसायों, ठेकेदारों और उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा करने वाली है, क्योंकि यह भविष्य के ऊर्जा क्षेत्र के लिए कुशल कार्यबल तैयार करेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी।
उच्च शिक्षा विभाग ने 25 अक्टूबर, 2026 को इस प्रस्ताव की घोषणा की। इन नए पाठ्यक्रमों में सौर ऊर्जा (सूर्य से बिजली बनाना), पवन ऊर्जा (हवा से बिजली बनाना), इलेक्ट्रिक वाहन (बैटरी से चलने वाली गाड़ियाँ), बैटरी तकनीक (बैटरी के निर्माण और रखरखाव), ग्रीन हाइड्रोजन (पानी से बनने वाली स्वच्छ ऊर्जा), और कार्बन अकाउंटिंग (कंपनियों द्वारा कार्बन उत्सर्जन को मापना और कम करना) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल होंगे। ये सभी ऐसे क्षेत्र हैं जो पर्यावरण के अनुकूल हैं और भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने वाले छात्रों को न केवल रोजगार मिलेगा, बल्कि वे नए व्यवसाय भी शुरू कर सकेंगे।
ये स्नातक (ग्रेजुएशन) और स्नातकोत्तर (पोस्ट-ग्रेजुएशन) स्तर के कार्यक्रम होंगे। इन्हें इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों के इनपुट के साथ डिजाइन किया जा रहा है। इसका मतलब है कि इन कोर्सों को उद्योग की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जाएगा, ताकि छात्रों को व्यावहारिक और रोजगारपरक ज्ञान मिल सके। यह सुनिश्चित करेगा कि पास होने वाले छात्र सीधे उद्योग की मांगों को पूरा कर सकें।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को "ग्रीन जॉब्स" के लिए आवश्यक कौशल से लैस करना है। ग्रीन जॉब्स उन नौकरियों को कहते हैं जो पर्यावरण की रक्षा या बहाली में योगदान करती हैं, जैसे कि नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों का संचालन, इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्माण, या ऊर्जा दक्षता समाधानों का विकास। बिहार सरकार का मानना है कि इन पाठ्यक्रमों से न केवल छात्रों को नए करियर के अवसर मिलेंगे, बल्कि राज्य में हरित ऊर्जा क्षेत्र के विकास को भी गति मिलेगी, जिससे समग्र आर्थिक विकास होगा।
छोटे व्यवसायियों और ठेकेदारों के लिए, यह एक स्पष्ट संकेत है कि हरित ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और सेवाओं की मांग बढ़ने वाली है। उदाहरण के लिए, सौर पैनल लगाने वाले ठेकेदार, इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने वाले उद्यमी, या ग्रीन बिल्डिंग सामग्री प्रदान करने वाले आपूर्तिकर्ता भविष्य में अधिक काम की उम्मीद कर सकते हैं। इसके अलावा, इन नए कुशल श्रमिकों की उपलब्धता से स्थानीय व्यवसायों को भी लाभ होगा, क्योंकि उन्हें अपने हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए योग्य कर्मचारी आसानी से मिल सकेंगे। यह पहल बिहार को एक स्थायी और पर्यावरण-अनुकूल भविष्य की ओर ले जाने में मदद करेगी, साथ ही आर्थिक विकास के नए रास्ते भी खोलेगी और स्थानीय स्तर पर उद्यमशीलता को बढ़ावा देगी।
