मुख्यमंत्री ने पटना और मुजफ्फरपुर में दो नए कौशल केंद्रों के लिए भूमि देने का आश्वासन दिया

ThisNews Desk
मुख्यमंत्री ने पटना और मुजफ्फरपुर में दो नए कौशल केंद्रों के लिए भूमि देने का आश्वासन दिया
चित्र: Jonathan Cooper / Pexels

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लघु उद्योग भारती, बिहार के एक प्रतिनिधिमंडल को पटना और मुजफ्फरपुर में दो नए कौशल केंद्रों (स्किल सेंटरों) के लिए भूमि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। इन केंद्रों का उद्देश्य बिहार के युवाओं को कुशल बनाना है, जिससे उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। यह घोषणा 8 अक्टूबर, 2026 को हुई जब प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर राज्य में छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) के सामने आने वाले मुद्दों पर चर्चा की और एक उद्यमी-अनुकूल माहौल को बढ़ावा देने का आग्रह किया।

यह पहल बिहार सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र और कौशल विकास को बढ़ावा देने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। MSME वे छोटे व्यवसाय होते हैं जो अर्थव्यवस्था में बड़ी संख्या में रोजगार पैदा करते हैं। इसी कड़ी में, 28 अप्रैल, 2026 को पटना के बिहटा में ₹171 करोड़ की लागत से एक MSME प्रौद्योगिकी केंद्र का उद्घाटन किया गया था, जिसका लक्ष्य सालाना 10,000 युवाओं को प्रशिक्षित करना है। इस केंद्र की स्थापना भारत सरकार के MSME मंत्रालय द्वारा बिहार सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई 15 एकड़ भूमि पर की गई है। इसके अतिरिक्त, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, रोहतास और मुंगेर में चार विस्तार केंद्र भी शुरू किए गए हैं।

जुलाई 2026 के आसपास अनावरण की गई बिहार MSME नीति 2026 का लक्ष्य एक करोड़ MSME इकाइयों को औपचारिक रूप से पंजीकृत करना, एक करोड़ से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित करना और 500 से अधिक MSME इकाइयों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ना है। यह नीति कोसी, भागलपुर, मुंगेर और पूर्णिया में चार प्रौद्योगिकी और विस्तार केंद्र स्थापित करने का भी प्रस्ताव करती है, साथ ही सालाना एक लाख उद्यमियों को 'उद्योग 4.0' प्रशिक्षण प्रदान करेगी। 'उद्योग 4.0' आधुनिक औद्योगिक तकनीकों को संदर्भित करता है जो स्मार्ट तकनीक का उपयोग करती हैं। उद्यमियों के लिए ₹5 करोड़ तक की सब्सिडी के वित्तीय प्रोत्साहन का भी प्रस्ताव है, जिसमें महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, दिव्यांग और ट्रांसजेंडर उद्यमियों के लिए 10% अतिरिक्त पूंजीगत सब्सिडी (व्यवसाय स्थापित करने की लागत को कम करने के लिए सरकारी सहायता) शामिल है।

राज्य सरकार बिहार को एक आधुनिक औद्योगिक और विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। पटना और मुजफ्फरपुर सहित विभिन्न जिलों में 12 सूक्ष्म और लघु औद्योगिक इकाइयों को 9.14 एकड़ औद्योगिक भूमि और 'प्लग-एंड-प्ले शेड' (तैयार-उपयोग औद्योगिक स्थान) आवंटित करके ₹132.60 करोड़ के निवेश के माध्यम से लगभग 2,500 रोजगार के अवसर पैदा किए जाएंगे। बिहार कौशल विकास मिशन (BSDM) युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। MSME पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और उद्यमिता व कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए 24 अगस्त, 2026 को भोजपुर में RAMP कार्यक्रम के तहत एक उद्यमिता विकास कार्यक्रम (EDP) प्रशिक्षण केंद्र का भी उद्घाटन किया गया था। इसके अलावा, बिहार का पहला राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (महिला) 23 जुलाई, 2026 को पटना के बिहटा में खोला गया, जिसका लक्ष्य दो वर्षों के भीतर लगभग 500 महिलाओं को विभिन्न रोजगारोन्मुखी व्यवसायों में प्रशिक्षित करना है।

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