बिहार सरकार राज्य की शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने जा रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप, सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से ही छात्रों के लिए व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education) शुरू की जाएगी। यह पहल आगामी 2026-27 शैक्षणिक सत्र से लागू होने वाली है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के कार्यान्वयन में अग्रणी भूमिका निभा रही है।
छोटे व्यवसायियों, ठेकेदारों, व्यापारियों और नवोद्यमियों (entrepreneurs) के लिए यह खबर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। व्यावसायिक शिक्षा का सीधा अर्थ है छात्रों को ऐसे व्यावहारिक कौशल सिखाना जिनकी बाजार में वास्तविक मांग है। उदाहरण के लिए, छात्र बढ़ईगीरी, बिजली का काम, कंप्यूटर हार्डवेयर रिपेयरिंग, सिलाई, कृषि से संबंधित आधुनिक तकनीकें या अन्य स्थानीय उद्योगों से जुड़े हुनर सीख सकते हैं। यह केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं होगा, बल्कि छात्रों को हाथों-हाथ काम सिखाया जाएगा, जिससे वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।
यह कदम बिहार में एक कुशल कार्यबल (skilled workforce) तैयार करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। कुशल कार्यबल का मतलब ऐसे लोग हैं जिनके पास किसी विशेष कार्य को करने के लिए आवश्यक विशेषज्ञता और अनुभव होता है। जब अधिक युवा इन कौशलों से लैस होंगे, तो उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे। वे न केवल नौकरी ढूंढ पाएंगे, बल्कि अपना खुद का छोटा व्यवसाय (self-employment) भी शुरू कर सकेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
यह पहल छात्रों को केवल अकादमिक डिग्री हासिल करने के बजाय वास्तविक दुनिया की नौकरियों और व्यावसायिक अवसरों के लिए तैयार करेगी। यह युवाओं को उद्यमिता (entrepreneurship) की ओर प्रोत्साहित करेगा और उन्हें बिहार के आर्थिक विकास में सक्रिय रूप से योगदान देने में सक्षम बनाएगा। इससे राज्य में उद्योगों को भी प्रशिक्षित और सक्षम श्रमिक मिलेंगे, जिससे उत्पादन और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। यह सुनिश्चित करेगा कि बिहार के युवा भविष्य की चुनौतियों का सामना करने और आर्थिक रूप से सशक्त बनने के लिए तैयार हों।
