तेजस्वी यादव ने बिहार और पश्चिम बंगाल में नए चुनावों की मांग की; व्यावसायिक स्थिरता पर असर की आशंका

ThisNews Desk
तेजस्वी यादव ने बिहार और पश्चिम बंगाल में नए चुनावों की मांग की; व्यावसायिक स्थिरता पर असर की आशंका
चित्र: 女子 正真 / Pexels

बिहार में विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव ने 23 सितंबर, 2026 को बिहार और पश्चिम बंगाल में नए सिरे से चुनाव कराने की सार्वजनिक मांग की है। पटना में उन्होंने चुनाव आयोग (ईसीआई) पर अनियमितताओं और हेरफेर का आरोप लगाते हुए यह मांग उठाई।

यादव ने ईसीआई पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रति पक्षपाती होने का आरोप लगाया और दावा किया कि दोनों राज्यों में लोकतांत्रिक जनादेश को व्यापक चुनावी धोखाधड़ी और संस्थागत हेरफेर के माध्यम से "चुराया" गया था। उन्होंने विशेष रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर चिंता व्यक्त की, जिसमें आरोप लगाया गया कि यह बिहार और पश्चिम बंगाल में भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए मनमाने ढंग से किया गया था, जिसमें परिणामों को प्रभावित करने के लिए जानबूझकर नाम हटाए गए थे। यादव ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में संशोधन की भी आलोचना की, जिसमें कहा गया कि सरकार ने चयन पैनल में भारत के मुख्य न्यायाधीश को केंद्रीय कैबिनेट मंत्री से बदलने के लिए कानून में संशोधन किया, जिससे ईसीआई का संतुलन और स्वतंत्रता खतरे में पड़ गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों के अधिकार क्षेत्र को कमजोर किया। हालांकि, ईसीआई का कहना है कि एसआईआर से संबंधित सभी निर्णय तीनों आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे।

यह राजनीतिक घटनाक्रम बिहार के व्यवसायों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण है। राजनीतिक अस्थिरता और अनिश्चितता का माहौल निवेश आकर्षित करने और व्यावसायिक विश्वास (बिजनेस कॉन्फिडेंस) को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है। चुनावी धोखाधड़ी और एक कथित रूप से समझौता किए गए चुनाव आयोग के आरोप शासन में विश्वास को कमजोर कर सकते हैं, जो एक अनुमानित व्यावसायिक वातावरण के लिए एक मूलभूत तत्व है।

बिहार की अर्थव्यवस्था पहले से ही महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना कर रही है, जिसमें उच्च राजकोषीय घाटा (सरकार के खर्च और आय के बीच का अंतर), बढ़ता ऋण भार और बेरोजगारी व प्रवासन के मुद्दे शामिल हैं। लंबे समय तक राजनीतिक अनिश्चितता या असमय चुनावों की संभावना सरकार का ध्यान महत्वपूर्ण आर्थिक विकास पहलों से भटका सकती है। इनमें केंद्रीय बजट 2026-27 और बिहार के राज्य बजट में उल्लिखित प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और औद्योगिक विकास योजनाएं शामिल हैं। बिहार का 2026-27 का राज्य बजट ₹3.47 लाख करोड़ है, जिसमें ₹13.1 लाख करोड़ का अनुमानित सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) और 2025-26 की तुलना में 15% की अनुमानित वृद्धि है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक एक करोड़ युवाओं को नौकरी और रोजगार प्रदान करना है। पिछले चुनावों में भी "चुनाव-पूर्व घोषणाएँ" देखी गई हैं, जिन्होंने राज्य के बजट पर दबाव डाला है, और नए चुनाव से इसी तरह के वित्तीय दबाव हो सकते हैं, जिससे विकास पर सार्वजनिक खर्च प्रभावित हो सकता है।

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