बिहार में हेली-टूरिज्म सेवा शुरू, धार्मिक पर्यटन पर ₹4,280 करोड़ से अधिक का निवेश

ThisNews Desk
बिहार में हेली-टूरिज्म सेवा शुरू, धार्मिक पर्यटन पर ₹4,280 करोड़ से अधिक का निवेश
चित्र: William Gevorg Urban / Pexels

बिहार 2026 में अपने पर्यटन क्षेत्र का महत्वपूर्ण आधुनिकीकरण कर रहा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल तकनीक, हेली-टूरिज्म और होमस्टे पहल को एकीकृत किया जा रहा है। इस व्यापक बदलाव का मुख्य उद्देश्य राज्य की समृद्ध विरासत और प्राकृतिक आकर्षणों का लाभ उठाकर आर्थिक विकास को गति देना और स्थानीय आबादी के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।

इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा 12 जुलाई, 2026 को "मुख्यमंत्री बिहार हेली-टूरिज्म एवं एयर टूरिज्म सेवा योजना 2026" का शुभारंभ है। इस सेवा के लिए ऑनलाइन बुकिंग 13 जुलाई, 2026 को शुरू हुई और परिचालन 18 जुलाई, 2026 से प्रारंभ हो गया। योजना का पहला चरण 15 जुलाई, 2026 से 15 जनवरी, 2027 तक चलेगा, जो पटना को वाल्मीकिनगर, कैमूर में मां मुंडेश्वरी मंदिर और राजगीर जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन गंतव्यों से जोड़ता है। पटना के ऊपर हेलीकॉप्टर जॉयराइड सप्ताहांत पर ₹2,100 प्रति व्यक्ति के शुल्क पर उपलब्ध है। अन्य मार्गों के लिए सरकार प्रति टिकट ₹15,422 तक की सब्सिडी प्रदान कर रही है। यहां "सब्सिडी" का अर्थ है कि सरकार यात्रियों को किराए में वित्तीय सहायता देती है, जिससे हवाई यात्रा आम लोगों के लिए अधिक सस्ती और सुलभ हो जाती है। बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम (BSTDC) इन हवाई सेवाओं के लिए कार्यान्वयन एजेंसी है, जो इनकी सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करती है।

राज्य धार्मिक पर्यटन सर्किटों में भी भारी निवेश कर रहा है, जिससे छोटे व्यवसायों और ठेकेदारों के लिए निर्माण और सेवा क्षेत्र में बड़े अवसर खुलेंगे। सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में ₹1,000 करोड़ से अधिक की लागत से एक भव्य मां सीता मंदिर, गया में ₹2,500 करोड़ की लागत से विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर और सोनपुर में ₹680 करोड़ से अधिक के निवेश से हरिहरनाथ मंदिर कॉरिडोर परियोजनाएं शामिल हैं। ये विशाल परियोजनाएं निर्माण क्षेत्र में रोजगार सृजित करेंगी। अन्य धार्मिक स्थल जैसे बाबा गरीबनाथ मंदिर, अशोक धाम और अहिल्यास्थान का भी विकास किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, बोधगया में ₹165 करोड़ की लागत से एक बौद्ध ध्यान और अनुभव केंद्र विकसित किया जा रहा है। बिहार पर्यटन विभाग प्रमुख शिव मंदिरों को जोड़ने के लिए "शिव सर्किट" की खोज कर रहा है, जो मौजूदा बुद्ध, जैन, सिख और रामायण सर्किटों के समान होगा। "सर्किट" का मतलब है एक पूर्व-निर्धारित मार्ग जो कई संबंधित पर्यटन स्थलों को जोड़ता है, जिससे पर्यटकों के लिए यात्रा आसान हो जाती है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है। ये सभी पहल राज्य में पर्यटन उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और स्थानीय उद्यमियों के लिए व्यापार के नए रास्ते खोलने में सहायक होंगी।

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