नई दिल्ली में 10 सितंबर 2026 को आयोजित युनाइटेड इकोनॉमिक ब्रिक्स समिट 2026 में सहरसा के विधायक और इंडियन इंक्लूसिव पार्टी (आईआईपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ई. आईपी गुप्ता ने बिहार के युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने का सशक्त आह्वान किया है। उन्होंने देश-विदेश के उद्योगपतियों, व्यापारियों, निवेशकों और उद्यमियों से बिहार में उद्योग और व्यापार स्थापित करने की अपील की।
गुप्ता ने जोर देकर कहा कि राज्य में निवेश और औद्योगिक विस्तार से न केवल नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे, बल्कि यह बिहार की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा। उनका मानना है कि इससे युवाओं का पलायन रुकेगा और उन्हें अपने गृह राज्य में ही बेहतर भविष्य बनाने का मौका मिलेगा। "निवेश" का अर्थ है किसी व्यवसाय या परियोजना में पैसा लगाना ताकि भविष्य में लाभ कमाया जा सके। जब उद्योगपति बिहार में निवेश करेंगे, तो वे कारखाने लगाएंगे, दुकानें खोलेंगे और अन्य व्यवसाय शुरू करेंगे, जिससे स्थानीय लोगों के लिए काम के अवसर बनेंगे।
यह घोषणा बिहार सरकार की व्यापक रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास योजनाओं के अनुरूप है। बिहार सरकार ने 2026 में 150,000 से अधिक सरकारी नौकरियां और अन्य रोजगार प्रदान करने की योजना बनाई है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अगले पांच वर्षों, यानी 2030 तक, 10 मिलियन (1 करोड़) रोजगार के अवसर पैदा करने और राज्य से श्रम पलायन को पूरी तरह समाप्त करने की महत्वाकांक्षी घोषणा की है।
राज्य सरकार ने औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। जुलाई 2026 में, बिहार कैबिनेट ने ₹25,000 करोड़ की एक महत्वपूर्ण औद्योगिक विकास योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देना, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हो और अधिक निवेश आकर्षित हो सके। इसके अतिरिक्त, बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज-2025 को 31 दिसंबर 2026 तक या नई औद्योगिक नीति लागू होने तक बढ़ा दिया गया है। यह पैकेज निवेशकों को विभिन्न प्रकार की रियायतें और प्रोत्साहन प्रदान करता है, जिससे बिहार में व्यवसाय स्थापित करना और अधिक आकर्षक बन जाता है। इन सरकारी प्रयासों और ई. आईपी गुप्ता जैसे नेताओं के आह्वान से बिहार में आर्थिक विकास और रोजगार सृजन की नई संभावनाएं खुल रही हैं।
