बिहार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹4.95 लाख करोड़ की वार्षिक ऋण योजना का लक्ष्य रखा, बैंकों को ऋण बढ़ाने का निर्देश

ThisNews Desk
बिहार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹4.95 लाख करोड़ की वार्षिक ऋण योजना का लक्ष्य रखा, बैंकों को ऋण बढ़ाने का निर्देश — प्रतीकात्मक तस्वीर
चित्र: Arthur Shuraev / Pexels

बिहार सरकार ने राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने और छोटे व्यवसायों, उद्यमियों, किसानों तथा अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य ने ₹4.95 लाख करोड़ की महत्वाकांक्षी वार्षिक ऋण योजना (एसीपी) का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, राज्य सरकार ने बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे ऋण वितरण में उल्लेखनीय वृद्धि करें।

यह महत्वपूर्ण निर्देश 23 अक्टूबर, 2026 को पटना के पुराने सचिवालय में आयोजित एक उच्च-स्तरीय समिति की तीसरी समीक्षा बैठक के दौरान जारी किए गए। इस बैठक में राज्य के आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए बैंकों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।

वार्षिक ऋण योजना (एसीपी) क्या है?
छोटे व्यवसायियों, ठेकेदारों और उद्यमियों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि वार्षिक ऋण योजना (एसीपी) क्या है। यह एक ऐसा लक्ष्य होता है जो बैंक हर साल तय करते हैं कि वे विभिन्न क्षेत्रों, जैसे कृषि, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME), शिक्षा, आवास और अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को कितना ऋण देंगे। इसका मुख्य उद्देश्य इन क्षेत्रों को पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान कर आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। जब एसीपी का लक्ष्य बढ़ता है, तो इसका सीधा मतलब यह होता है कि इन क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों और व्यवसायों के लिए बैंकों से ऋण प्राप्त करना आसान हो सकता है।

बिहार के लिए ₹4.95 लाख करोड़ का यह लक्ष्य राज्य के आर्थिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण वृद्धि को दर्शाता है। यह दर्शाता है कि सरकार चाहती है कि बैंक अधिक सक्रिय रूप से अर्थव्यवस्था के विभिन्न स्तंभों को सहारा दें। छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों (MSMEs) के लिए, यह एक अवसर हो सकता है कि वे अपने व्यापार का विस्तार करें, नई परियोजनाएं शुरू करें या अपनी कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करें। इसी तरह, कृषि क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों और ठेकेदारों को भी इस योजना से लाभ मिल सकता है।

सरकार का यह आग्रह बैंकों पर एक दबाव भी बनाता है कि वे ऋण आवेदन प्रक्रियाओं को सरल बनाएं और पात्र लाभार्थियों तक पहुंच बढ़ाएं। यह उम्मीद की जाती है कि बैंकों द्वारा ऋण वितरण में वृद्धि से राज्य में रोजगार के अवसर पैदा होंगे और समग्र आर्थिक गतिविधि में तेजी आएगी। यह कदम बिहार को आत्मनिर्भर बनाने और स्थानीय उद्यमशीलता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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