बिहार के गया जिले के डोभी में एक बड़े औद्योगिक विकास की शुरुआत हो गई है, जो राज्य के आर्थिक परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखता है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आज, 24 अक्टूबर 2026 को, गया इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी (IMC) के लिए एक विशेष वेब पोर्टल का औपचारिक रूप से शुभारंभ किया। इस महत्वपूर्ण लॉन्च के साथ ही, औद्योगिक इकाइयों को अपनी स्थापना के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया अब ऑनलाइन शुरू हो गई है।
यह विशाल परियोजना 1670 एकड़ के क्षेत्र में फैली हुई है और इसे बिहार की पहली मेगा औद्योगिक टाउनशिप तथा राज्य का सबसे बड़ा विनिर्माण क्लस्टर बनने का गौरव प्राप्त होगा। एक इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी (IMC) का अर्थ है एक ऐसा व्यापक औद्योगिक क्षेत्र जहाँ विनिर्माण इकाइयों (फैक्ट्रियों) के लिए सभी आवश्यक सुविधाएँ और बुनियादी ढाँचा एक ही स्थान पर उपलब्ध होता है। इसमें बिजली, पानी, सड़क संपर्क, लॉजिस्टिक्स समर्थन और अन्य महत्वपूर्ण सेवाएँ शामिल होती हैं, जिससे छोटे और बड़े दोनों तरह के व्यवसायों के लिए उत्पादन और संचालन बहुत आसान हो जाता है। यह उद्यमियों को एक अनुकूल वातावरण प्रदान करता है जहाँ वे अपनी इकाइयों को कुशलतापूर्वक चला सकते हैं।
यह महत्वाकांक्षी पहल भारत सरकार के अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे (Industrial Corridor) का एक महत्वपूर्ण घटक है। औद्योगिक गलियारा एक ऐसा सुनियोजित मार्ग होता है जो प्रमुख औद्योगिक केंद्रों को जोड़ता है, जिससे उनके बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार तथा परिवहन सुगम होता है। गया IMC के इस विशिष्ट घटक की अनुमानित लागत ₹1339.02 करोड़ है, जो इसके पैमाने और महत्व को दर्शाता है।
इस परियोजना का निर्माण कार्य 3 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ था और इसके 2 अप्रैल 2029 तक पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है। बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड (BIMCGCL) इस परियोजना के विकास और प्रबंधन का कार्यभार संभाल रही है। यह पहल बिहार में औद्योगिक विकास को गति देने, नए व्यवसायों को आकर्षित करने और स्थानीय स्तर पर रोज़गार के व्यापक अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
छोटे व्यवसायियों, ठेकेदारों, व्यापारियों और उद्यमियों के लिए यह एक बड़ा अवसर है। उन्हें अपनी विनिर्माण इकाइयाँ स्थापित करने के लिए एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और एकीकृत औद्योगिक वातावरण मिलेगा, जिससे उनकी परिचालन लागत कम हो सकती है और उत्पादकता बढ़ सकती है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह वेब पोर्टल भूमि आवंटन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करेगा, जिससे निवेशकों को आसानी होगी और बिहार में व्यापार करना और भी आकर्षक बनेगा। यह कदम राज्य को औद्योगिक मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान दिलाएगा।
