सुपौल जिले के पिपरा प्रखंड अंतर्गत दिनपट्टी पंचायत के सखुवा गांव में स्थित राजा पोखर फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट का उप विकास आयुक्त (DDC) इंद्रवीर कुमार ने सितंबर 2026 में निरीक्षण किया। यह संयंत्र बिहार में नवीकरणीय ऊर्जा और कृषि-व्यवसाय के एकीकरण का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
525 किलोवाट पीक (kWp) क्षमता वाला यह प्लांट मछली पालन और बिजली उत्पादन दोनों को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। "किलोवाट पीक" (kWp) एक व्यावसायिक शब्द है जो किसी सौर ऊर्जा संयंत्र की अधिकतम बिजली उत्पादन क्षमता को दर्शाता है। इसका मतलब है कि यह संयंत्र अपनी सर्वोत्तम परिस्थितियों में 525 किलोवाट बिजली पैदा कर सकता है। छोटे व्यवसायियों और उद्यमियों के लिए, यह समझना महत्वपूर्ण है कि ऐसी परियोजनाएं स्थानीय बिजली आपूर्ति को मजबूत करती हैं और नए व्यावसायिक अवसर पैदा कर सकती हैं, जैसे कि मछली पालन के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन।
इस फ्लोटिंग सोलर प्लांट की खासियत यह है कि यह एक ही जल निकाय का उपयोग बिजली बनाने और मछली पालन दोनों के लिए करता है। यह भूमि के उपयोग को अनुकूलित करता है और संसाधनों का कुशल उपयोग सुनिश्चित करता है। मछली पालन करने वाले किसानों के लिए यह एक अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकता है, जबकि क्षेत्र को स्वच्छ बिजली भी मिलती है।
निरीक्षण के दौरान, DDC इंद्रवीर कुमार ने पाया कि प्लांट के तीन इन्वर्टर खराब थे। इन्वर्टर सौर पैनलों द्वारा उत्पन्न डीसी (डायरेक्ट करंट) बिजली को एसी (अल्टरनेटिंग करंट) बिजली में बदलते हैं, जिसका उपयोग घरों और उद्योगों में किया जाता है। इन्वर्टर की खराबी का मतलब है कि प्लांट अपनी पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन नहीं कर पा रहा होगा, जिससे ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
इस तरह की परियोजनाओं का सुचारु संचालन बिहार के ऊर्जा लक्ष्यों और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। खराब इन्वर्टर की मरम्मत और रखरखाव सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि यह संयंत्र अपनी पूरी क्षमता से काम कर सके और क्षेत्र के व्यवसायों और निवासियों को लाभ पहुंचा सके। यह घटना संयंत्रों के नियमित रखरखाव और निरीक्षण के महत्व को रेखांकित करती है, खासकर जब वे दोहरे उद्देश्यों की पूर्ति करते हों।
