प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने 24 सितंबर, 2025 को बिहार में 104 किलोमीटर लंबे बख्तियारपुर-राजगीर-तिलैया एकल रेलवे लाइन खंड के दोहरीकरण को मंजूरी दे दी है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा घोषित इस महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजना की अनुमानित लागत 2,192 करोड़ रुपये है।
यह परियोजना बिहार के चार जिलों को कवर करेगी, जिनमें आकांक्षी जिले गया और नवादा भी शामिल हैं। रेल लाइन का दोहरीकरण का सीधा अर्थ है कि अब एक ही पटरी की जगह दो पटरियां होंगी। इससे ट्रेनों की आवाजाही में लगने वाला समय कम होगा, क्योंकि अब एक ट्रेन को दूसरी ट्रेन के गुजरने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यह रेलवे नेटवर्क की क्षमता को बढ़ाएगा, जिससे अधिक ट्रेनें चल सकेंगी और माल ढुलाई व यात्री यातायात दोनों में सुधार होगा।
छोटे व्यवसायियों, ठेकेदारों और उद्यमियों के लिए यह परियोजना कई अवसर लेकर आएगी। निर्माण कार्य के लिए विभिन्न सामग्रियों की खरीद, श्रमबल की आवश्यकता और अन्य संबंधित सेवाओं के लिए निविदाएं जारी की जाएंगी, जिससे स्थानीय ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को काम मिलेगा। गया और नवादा जैसे आकांक्षी जिलों में बेहतर रेल कनेक्टिविटी से कृषि उत्पादों और अन्य वस्तुओं को बाजारों तक पहुंचाना आसान हो जाएगा, जिससे किसानों और व्यापारियों को लाभ होगा।
यह परियोजना भारतीय रेलवे नेटवर्क में लगभग 104 किलोमीटर की अतिरिक्त लाइन जोड़ेगी। बेहतर कनेक्टिविटी से न केवल व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि राजगीर जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी आसान होगी, जिससे पर्यटन उद्योग को भी फायदा होगा। कुल मिलाकर, यह रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना बिहार की अर्थव्यवस्था को गति देने और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
