दरभंगा में 'युवा आपदा मित्र' प्रशिक्षण शिविर के साथ बिहार में जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन पर जोर दिया जा रहा है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) के राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के 200 स्वयंसेवकों के लिए 13 सितंबर, 2026 को आयोजित इस शिविर में 'जल, जीवन और हरियाली' के महत्व पर चर्चा हुई। यह पहल बिहार जैसे कृषि प्रधान राज्य में सतत विकास और पर्यावरणीय संतुलन के लिए पानी, जीवन और हरियाली के अंतर्संबंध को रेखांकित करती है।
राज्य सरकार ने अपने महत्वाकांक्षी 'जल-जीवन-हरियाली अभियान' को 2025 से 2030 तक अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ा दिया है। यह अभियान न केवल एक सरकारी कार्यक्रम है, बल्कि हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। लघु जल संसाधन विभाग की 18 जून, 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में शुरू हुए इस अभियान के तहत 2,537 स्वीकृत परियोजनाओं में से 2,371 (लगभग 95%) पूरी हो चुकी हैं। इन परियोजनाओं से लगभग 2.52 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बहाल हुई है और लगभग 1,094 लाख क्यूबिक मीटर जल भंडारण क्षमता का निर्माण हुआ है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 206.39 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 154 अतिरिक्त परियोजनाओं का प्रस्ताव है, जिससे 16,585 हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता बढ़ेगी।
इस अभियान ने पिछले सात वर्षों में 21.24 करोड़ से अधिक पौधे लगाकर बिहार के हरित आवरण को 15.5% तक बढ़ाया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में नर्सरी विकास और फलदार वृक्षारोपण के माध्यम से आजीविका के अवसर भी पैदा हुए हैं, खासकर महिलाओं को लाभ हुआ है। यह छोटे व्यवसायों और ठेकेदारों के लिए भी अवसर पैदा करता है, जो इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में शामिल होते हैं।
जल प्रबंधन को मजबूत करने के लिए बिहार सरकार ने कई महत्वपूर्ण नीतियां भी अनुमोदित की हैं। 15 जुलाई, 2026 को राज्य मंत्रिमंडल ने "उपचारित अपशिष्ट जल के सुरक्षित पुन: उपयोग की नीति, बिहार-2026" को मंजूरी दी। यह नीति उद्योगों, कृषि और शहरी सेवाओं के लिए उपचारित अपशिष्ट जल के उपयोग को बढ़ावा देगी, जिससे ताजे पानी पर निर्भरता कम होगी और रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहन मिलेगा। यह उद्योगों के लिए पानी की लागत कम करने में सहायक होगी।
15 सितंबर, 2026 को "बिहार जल संसाधन बहाली और गाद प्रबंधन नीति, 2026" को भी मंजूरी मिली। इसका उद्देश्य नदियों की क्षमता में सुधार करना, जल प्रवाह बनाए रखना, बाढ़ प्रबंधन को मजबूत करना और निर्माण कार्यों में गाद का उपयोग करना है। निर्माण क्षेत्र से जुड़े ठेकेदारों और व्यवसायों के लिए गाद का उपयोग एक नया अवसर प्रदान करेगा।
इसके अतिरिक्त, "बिहार भूजल (प्रबंधन और विनियमन) अधिनियम, 2026" का मसौदा तैयार किया जा रहा है, जो भूजल के उपयोग और संरक्षण को विनियमित करेगा। इसमें जिला भूजल प्राधिकरणों का गठन और भूजल उपयोगकर्ताओं के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की आवश्यकता शामिल होगी। यह नीति भूजल पर निर्भर व्यवसायों के लिए महत्वपूर्ण होगी।
राज्य मंत्रिमंडल ने बाढ़ सुरक्षा, जल-जीवन-हरियाली अभियान और अन्य सिंचाई कार्यों के लिए बिहार आकस्मिकता निधि से ₹1,000 करोड़ प्राप्त करने को भी मंजूरी दी है। यह राशि इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए निरंतर वित्तपोषण सुनिश्चित करेगी, जिससे संबंधित क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बनी रहेंगी।
