बिहार सरकार राज्य के छह जिलों में 44 नए पत्थर खनन भूखंडों की ई-नीलामी के साथ पत्थर खनन गतिविधियों को फिर से शुरू करने की तैयारी में है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय निर्माण सामग्री की उपलब्धता बढ़ाना, राजस्व उत्पन्न करना और हजारों रोजगार के अवसर पैदा करना है।
खान एवं भूतत्व विभाग इस परियोजना का नेतृत्व कर रहा है, जिसमें रोहतास और नवादा जिलों के वन क्षेत्रों में खनन शुरू करने की योजना है। नवादा में 17 और रोहतास में 4 सहित कुल 44 ब्लॉक स्वीकृत किए गए हैं। अन्य जिलों में शेखपुरा (10), गया (9), औरंगाबाद (3) और बांका (1) शामिल हैं।
सरकार को इन 44 खनन ब्लॉकों से लगभग 2300 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, इन ब्लॉकों में 5 लाख करोड़ रुपये के महत्वपूर्ण निवेश का लक्ष्य रखा गया है, जिसका उद्देश्य नौ महीने के भीतर खनन कार्य शुरू करना है। रोहतास में एक दशक के बाद खनन गतिविधियों को फिर से शुरू करने से मजदूरों, ट्रांसपोर्टरों और निर्माण व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए हजारों स्थानीय रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए, नीलामी प्रक्रिया MSTC ई-नीलामी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आयोजित की जाएगी। ई-नीलामी एक ऑनलाइन बोली प्रक्रिया है जो बोलीदाताओं को इंटरनेट के माध्यम से बोली लगाने की अनुमति देती है। विभाग वन भूमि के गैर-वन उपयोग के लिए अनुमति प्राप्त करने और इस उद्देश्य के लिए एक सलाहकार नियुक्त करने की प्रक्रिया में है। अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए 1000 खनन कांस्टेबलों की भर्ती भी की जा रही है। बिहार खनिज नियम, 2026 में संशोधन किए गए हैं, जिसमें अवैध खनन के लिए पांच लाख रुपये तक के जुर्माने सहित सख्त दंड का प्रावधान है।
नीलामी की तैयारी अगस्त 2026 तक पूरे जोर पर है। नवादा जिले के आठ पत्थर ब्लॉकों के लिए ई-नीलामी 3 सितंबर से 12 सितंबर, 2026 तक निर्धारित है। रोहतास और गया सहित अन्य महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों के लिए, पंजीकरण और साइट विजिट 10 सितंबर, 2026 को शुरू होगी, तकनीकी और वित्तीय बोलियां 21 अक्टूबर तक जमा की जाएंगी, और इलेक्ट्रॉनिक फॉरवर्ड नीलामी 12 नवंबर, 2026 को प्रस्तावित है। रोहतास में खनन जुलाई 2026 में फिर से शुरू होने की उम्मीद है।
यह पहल बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। यह झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे पड़ोसी राज्यों पर निर्भरता कम करके पत्थर और बजरी की लागत को कम करेगी, जिससे आम नागरिकों को घर बनाने में और सरकारी निर्माण परियोजनाओं में लाभ होगा। इससे राज्य सरकार के लिए राजस्व (आय) बढ़ेगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को समर्थन मिलेगा और बिहार में औद्योगिक विकास में योगदान होगा।
