पटना हाईकोर्ट ने संस्कृत स्कूल की मान्यता पर पुनर्विचार का दिया निर्देश; राज्य में मदरसों और संस्कृत विद्यालयों का ऑडिट जारी

ThisNews Desk
पटना हाईकोर्ट ने संस्कृत स्कूल की मान्यता पर पुनर्विचार का दिया निर्देश; राज्य में मदरसों और संस्कृत विद्यालयों का ऑडिट जारी
चित्र: Anshu Kumar / Pexels

पटना हाईकोर्ट ने बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड को मधुबनी जिले के झोटन अनंत संस्कृत हाई स्कूल, नवानगर, खोजपुर की मान्यता के आवेदन पर फिर से विचार करने का निर्देश दिया है। यह आवेदन 2014 से लंबित था।

न्यायमूर्ति हरीश कुमार की एकल पीठ ने स्कूल के शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों, जिनमें प्रियंका कुमारी और अन्य शामिल हैं, द्वारा दायर रिट याचिकाओं पर सुनवाई की। इन याचिकाओं में मान्यता प्रदान करने के निर्देश मांगे गए थे। कोर्ट ने पाया कि बिहार गैर-सरकारी संस्कृत विद्यालय (मान्यता की शर्तें) नियमावली, 1993 का नियम 5, संबंधित जिला मजिस्ट्रेट की रिपोर्ट और सिफारिश के आधार पर ऐसे आवेदनों पर विचार करना अनिवार्य बनाता है।

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को चार सप्ताह के भीतर बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड के सचिव को सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ एक नया आवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। आवेदन प्राप्त होने पर, सचिव को 1993 के नियमों के अनुसार मधुबनी के जिला मजिस्ट्रेट से रिपोर्ट का अनुरोध करना अनिवार्य होगा। नए आवेदन प्राप्त होने से लेकर अंतिम निर्णय तक की पूरी पुनर्विचार प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर, अधिमानतः तीन महीने के भीतर पूरा किया जाना चाहिए। इस मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से श्री ब्रजेश वर्मा, राज्य की ओर से श्री राघवानंद और बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड की ओर से श्री शशांक शेखर झा ने पैरवी की।

यह निर्णय झोटन अनंत संस्कृत हाई स्कूल के कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि मान्यता मिलने से उनकी आजीविका सुरक्षित होगी। शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत छोटे व्यवसायों और ठेकेदारों के लिए, यह सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों के साथ काम करते समय अनुपालन और प्रक्रियाओं के महत्व को दर्शाता है।

इस बीच, जून 2026 में, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के नेतृत्व में बिहार शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों और संस्कृत विद्यालयों के राज्यव्यापी ऑडिट का आदेश दिया था। राज्य शिक्षा विभाग के सचिव विनोद सिंह गुंजियाल द्वारा निर्देशित इस ऑडिट का उद्देश्य संस्थागत अनुपालन को सत्यापित करना, धोखाधड़ी को रोकना और सरकारी धन के उचित उपयोग को सुनिश्चित करना है। भौतिक सत्यापन के लिए स्थानीय अधिकारियों की तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। कोई भी गैर-मान्यता प्राप्त या धोखाधड़ी से चलाए जा रहे संस्थान पाए जाने पर उन्हें बंद कर दिया जाएगा। यह ऑडिट सरकारी धन के जवाबदेह उपयोग और शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका व्यापक आर्थिक प्रभाव उन संस्थानों और उनसे जुड़े लोगों पर पड़ेगा।

यह ऑडिट उन सभी संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण है जो सरकारी सहायता पर निर्भर करते हैं, क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि सार्वजनिक धन का उपयोग सही तरीके से हो और केवल वैध संस्थाएं ही संचालित हों।

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