बिहार में स्वरोजगार और औद्योगिक विकास को गति देने के लिए मुख्यमंत्री उद्यमी योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। खास तौर पर, यह योजना खादी उद्योग को पुनर्जीवित करने पर केंद्रित है, जिससे सितंबर 2026 तक सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। खादी अब युवाओं के बीच फैशन, रोजगार और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बन रही है।
इस पहल के तहत, बिहार सरकार का उद्योग विभाग और बिहार राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड वित्तीय सहायता और समर्थन प्रदान कर रहे हैं। योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को नए विनिर्माण या सेवा उद्यम स्थापित करने के लिए ₹10 लाख तक की सहायता दी जाती है। इस राशि में ₹5 लाख का सीधा अनुदान (सब्सिडी) शामिल है, जिसे वापस नहीं करना होता है। शेष ₹5 लाख ब्याज-मुक्त ऋण के रूप में दिए जाते हैं, जिसे सात वर्षों में 84 समान मासिक किस्तों में चुकाना होता है। युवा उद्यमियों के लिए, ऋण के हिस्से पर नाममात्र 1% साधारण ब्याज लागू हो सकता है।
यह योजना छोटे व्यवसायियों और नए उद्यमियों के लिए एक बड़ा अवसर है। अनुदान का अर्थ है कि सरकार आपको व्यवसाय शुरू करने के लिए पैसे देती है जिसे आपको वापस नहीं करना पड़ता। ब्याज-मुक्त ऋण का मतलब है कि आपको केवल मूल राशि ही चुकानी होगी, उस पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आवेदन पोर्टल 25 फरवरी, 2026 से 23 मार्च, 2026 तक खुला था। चयनित आवेदकों का अनंतिम चयन 20 मई, 2026 को कम्प्यूटरीकृत रैंडमाइजेशन के माध्यम से किया गया था। इन चयनित आवेदकों को आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने के लिए 24 जून, 2026 तक का समय दिया गया था। योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल udyami.bihar.gov.in पर विजिट किया जा सकता है।
प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता के अलावा, बिहार राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड कताई के लिए चरखे और करघे स्थापित कर रहा है। साथ ही, यह बोर्ड कताई के प्रशिक्षण भी प्रदान कर रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं और खादी उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है। यह समग्र दृष्टिकोण बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय उद्यमों को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध हो रहा है।
