बिहार सरकार युवाओं को कुशल बनाने और रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में, 11 सितंबर, 2026 को बिहारशरीफ के जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र (DRCC) की एक टीम ने एसएस बालिका उच्च विद्यालय की 29 छात्राओं को कौशल विकास कार्यक्रमों की जानकारी दी। इस सत्र में बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड, मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना और कुशल युवा कार्यक्रम (KYP) के बारे में बताया गया। यह स्थानीय पहल राज्य भर में चल रही व्यापक कौशल विकास योजनाओं का हिस्सा है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार ने 2026 में युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। 12 अगस्त, 2026 को कैबिनेट ने 'विकसित बिहार के सात निश्चय – III' के तहत 'कुशल युवा कार्यक्रम' को 2026-27 से 2030-31 तक बढ़ाने की मंजूरी दी। इस पहल के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन, सौर प्रौद्योगिकी, विदेशी भाषाएं, डिजिटल मार्केटिंग और उद्यमिता जैसे नए युग के कौशल में प्रति वर्ष 2.57 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए 430 करोड़ रुपये से अधिक का व्यय स्वीकृत किया गया है। इससे 6,436 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है। बिहार कौशल विकास मिशन (BSDM) की प्रमुख योजना, कुशल युवा कार्यक्रम (KYP) को भी 2030-31 तक बढ़ाया गया है, जिसके लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹430.08 करोड़ का आवंटन किया गया है। KYP का उद्देश्य जीवन कौशल, संचार कौशल और बुनियादी कंप्यूटर साक्षरता के माध्यम से रोजगार क्षमता में सुधार करना है, जिसमें AI और डिजिटल प्रौद्योगिकियों को शामिल करने के लिए पाठ्यक्रम को अपडेट किया गया है। यह कार्यक्रम 15-28 वर्ष की आयु के बिहार निवासियों (आरक्षित श्रेणियों के लिए छूट के साथ) के लिए निःशुल्क है, जिन्होंने कक्षा 10 उत्तीर्ण की है।
कौशल विकास को और बढ़ावा देने के लिए, 23 जुलाई, 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री श्री जयंत चौधरी ने बिहटा, पटना में महिलाओं के लिए राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (NSTI-W) के एक स्थायी परिसर और पटना में एक स्किल इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (SIIC) की स्थापना की घोषणा की। बिहटा में NSTI (W) परिसर को ₹99.97 करोड़ के निवेश से विकसित किया जाएगा, जिसमें AI और प्रोग्रामिंग असिस्टेंट, ड्रोन तकनीशियन, सौर तकनीशियन और रेडियोलॉजी तकनीशियन सहित 13 ट्रेडों की पेशकश की जाएगी, जिसकी वार्षिक प्रशिक्षण क्षमता 435 प्रशिक्षुओं की होगी। SIIC, जिसे भारत सरकार से लगभग ₹7 करोड़ का समर्थन प्राप्त है, युवाओं को विदेशी भाषा प्रशिक्षण (अंग्रेजी, जर्मन, जापानी, फ्रेंच), अंतर्राष्ट्रीय प्लेसमेंट परामर्श और प्रवासन सहायता के माध्यम से वैश्विक करियर के लिए तैयार करेगा।
इसके अतिरिक्त, 15 जून, 2026 को केंद्रीय एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) मंत्री श्री जीतन राम मांझी और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खिजरसराय, गया जी में एक प्रौद्योगिकी केंद्र की आधारशिला रखी। यह केंद्र, सामान्य इंजीनियरिंग, भारी इंजीनियरिंग और कपड़ा परीक्षण पर ध्यान केंद्रित करते हुए, प्रति वर्ष 7,000 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षित करने और गया जी, औरंगाबाद, नालंदा और मुंगेर जैसे जिलों में एमएसएमई (छोटे व्यवसायों) का समर्थन करने का लक्ष्य रखता है। बिहार सरकार उद्यमिता, विनिर्माण और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए एक मसौदा बिहार एमएसएमई नीति 2026 भी तैयार कर रही है।
ये पहल बिहार के व्यवसायों, एमएसएमई, व्यापारियों, श्रमिकों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनका उद्देश्य कौशल अंतर (बाजार की जरूरतों और उपलब्ध कौशल के बीच का अंतर) को पाटना, उद्योग-प्रासंगिक प्रशिक्षण प्रदान करना और हरित अर्थव्यवस्था (पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित अर्थव्यवस्था) जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए एक कुशल कार्यबल तैयार करना है। नए युग के कौशल, अंतर्राष्ट्रीय रोजगार और एमएसएमई के लिए समर्थन पर ध्यान केंद्रित करने से राज्य भर में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलने, प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ने और महत्वपूर्ण रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
