मोतिहारी के प्रेक्षण गृह में किशोरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण शुरू

ThisNews Desk
मोतिहारी के प्रेक्षण गृह में किशोरों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण शुरू — प्रतीकात्मक तस्वीर
चित्र: Ivan Chumak / Pexels

मोतिहारी, बिहार: बिहार के मोतिहारी स्थित प्रेक्षण गृह में किशोरों को आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। यह कार्यक्रम 31 अक्टूबर, 2026 को शुरू हुआ, जिसका उद्देश्य इन युवा व्यक्तियों की रुचियों और क्षमताओं के अनुरूप व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। इसका अंतिम लक्ष्य उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने और रोजगारोन्मुखी कौशल विकसित करने में सक्षम बनाना है।

इस पहल का नेतृत्व प्रधान न्यायिक दंडाधिकारी ओम प्रकाश नारायण सिंह ने किया और इसे जन शिक्षण संस्थान, मोतिहारी के सहयोग से लागू किया जा रहा है। यह कार्यक्रम कमजोर वर्ग के युवाओं को कुशल कार्यबल का हिस्सा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह स्थानीय प्रयास बिहार सरकार के व्यापक राज्य-स्तरीय लक्ष्यों के अनुरूप है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में, बिहार सरकार ने उद्यमिता (अपना व्यवसाय शुरू करने) के माध्यम से एक करोड़ परिवारों को आत्मनिर्भर (स्वयं पर निर्भर) बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें राज्य के युवाओं को नौकरी प्रदाता बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। उद्योग और रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बिहार एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) नीति 2026 भी शुरू की गई है। सरकार एमएसएमई योजना के तहत 45,000 उद्यमियों को विकसित करने के लिए 3,500 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।

इसके अतिरिक्त, "कुशल युवा कार्यक्रम" (2026-27 से 2030-31 तक विस्तारित) के लिए 430 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ड्रोन, सौर प्रौद्योगिकी और डिजिटल मार्केटिंग जैसे "नए युग के रोजगार कौशल" में प्रशिक्षण प्रदान करना है, जिसमें सालाना 2.57 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित करने और 6,436 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य है। उच्च शिक्षा का समर्थन करने के लिए बिहार छात्र क्रेडिट कार्ड योजना के लिए भी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 950 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

मोतिहारी में यह पहल बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे कमजोर आबादी से एक कुशल कार्यबल के निर्माण में योगदान करती है। इन किशोरों को व्यावसायिक कौशल से लैस करके, यह उनकी रोजगार क्षमता को बढ़ाता है, संभावित रूप से सामाजिक बोझ को कम करता है और एमएसएमई तथा अन्य क्षेत्रों में उद्यमिता या रोजगार को बढ़ावा देता है। यह आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और राज्य भर में अधिक उत्पादक और कुशल युवा जनसांख्यिकी बनाने की बिहार की समग्र रणनीति के साथ संरेखित है।

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