बिहार राज्य SEMICON India 2026 में अपनी सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षमता को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रहा है। यह तीन दिवसीय आयोजन 17 से 19 सितंबर, 2026 तक यशोभूमि, नई दिल्ली में हो रहा है। बिहार सरकार का उद्योग विभाग इसमें भाग ले रहा है, जिसमें आवासीय आयुक्त मनोज कुमार सिंह और एमएसएमई निदेशक अमन समीर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल शामिल है। इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (IESA) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम बिहार के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय उद्योग हितधारकों, विशेषकर अमेरिका और जापान के लोगों के साथ जुड़ने का एक महत्वपूर्ण मंच है।
बिहार की भागीदारी का मुख्य केंद्र उसकी सेमीकंडक्टर नीति 2026 का प्रदर्शन करना है, जिसे राज्य मंत्रिमंडल ने 29 जनवरी, 2026 को मंजूरी दी थी और फरवरी/मार्च 2026 में आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया गया था। इस नीति का लक्ष्य राज्य के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में लगभग ₹25,000 करोड़ का निवेश आकर्षित करना है। इससे 200,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है। यह नीति ₹5,000 करोड़ से अधिक के प्रारंभिक निवेश के साथ तीन प्रमुख सेमीकंडक्टर इकाइयाँ स्थापित करने की योजना बनाती है। इनमें फैब्रिकेशन (फैब्स) और असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP) सुविधाएँ शामिल होंगी। सरल शब्दों में, फैब्स वे कारखाने हैं जहाँ सेमीकंडक्टर चिप्स बनाए जाते हैं, जबकि ATMP इकाइयाँ इन चिप्स को अंतिम उत्पादों में लगाने और उनकी गुणवत्ता जांचने का काम करती हैं।
नीति के तहत महत्वपूर्ण प्रोत्साहनों में ₹100 करोड़ की परियोजना लागत पर प्रति एकड़ ₹1 के टोकन मूल्य पर भूमि उपलब्ध कराना शामिल है। इसके अतिरिक्त, स्टांप शुल्क, पंजीकरण शुल्क और भूमि रूपांतरण शुल्क में छूट दी जाएगी। बिहार में निवेश करने वाली कंपनियों को केंद्र सरकार के प्रोत्साहनों के अतिरिक्त राज्य सरकार से 20% की अतिरिक्त सब्सिडी भी मिलेगी। अन्य लाभों में पात्र इकाइयों के लिए दस वर्षों तक ₹5 प्रति यूनिट की विशेष बिजली दर और ₹4 प्रति क्यूबिक मीटर की पानी दर शामिल है। पेटेंट लागत की 75% तक प्रतिपूर्ति और सावधि ऋणों पर 5% वार्षिक ब्याज सब्सिडी भी मिलेगी, जो सात वर्षों के लिए ₹25 करोड़ तक सीमित है।
इस नीति के तहत परियोजनाओं के प्रबंधन और निगरानी के लिए बिहार सेमीकंडक्टर मिशन का गठन किया गया है, जिसकी देखरेख एक उच्च-स्तरीय समिति करती है। यह पहल बिहार के व्यवसायों, एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों), व्यापारियों, श्रमिकों और उद्यमियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका उद्देश्य 2030 तक बिहार को पूर्वी भारत का एक तकनीकी केंद्र बनाना है। यह औद्योगिकरण को बढ़ावा देगा और सेमीकंडक्टर उत्पादन के लिए एक सहायक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करेगा। इस नीति से कौशल विकास को बढ़ावा मिलने, युवाओं में बेरोजगारी कम होने और अगले पांच वर्षों के भीतर बिहार की अर्थव्यवस्था में सेमीकंडक्टर क्षेत्र का योगदान 5% तक बढ़ने की उम्मीद है। इसका लक्ष्य 50,000 से अधिक पेशेवरों का एक कुशल कार्यबल विकसित करना और आईआईटी पटना में एक सेमीकंडक्टर अनुसंधान केंद्र स्थापित करना भी है।
