बिहार सरकार ने राज्य में शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इसमें स्कूलों और कॉलेजों दोनों में "उत्कृष्टता केंद्र" (Centers of Excellence) स्थापित करना शामिल है, जिसमें व्यावसायिक और तकनीकी शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। इन कदमों का उद्देश्य राज्य के युवाओं को आधुनिक कौशल से लैस कर उनकी रोजगारपरकता बढ़ाना और बिहार के आर्थिक विकास में योगदान देना है।
शिक्षा विभाग और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) राज्य के सभी 38 जिलों में कम से कम एक स्कूल को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना तैयार कर रहे हैं। इन स्कूलों में पारंपरिक विषयों के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और मोबाइल रिपेयरिंग जैसे आधुनिक पाठ्यक्रम उपलब्ध होंगे। सितंबर 2026 में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस योजना की घोषणा की थी। इन केंद्रों में आधुनिक बुनियादी ढांचा, डिजिटल कक्षाएं, उन्नत प्रयोगशालाएं और बेहतर खेल सुविधाएं होंगी, जो राष्ट्रीय स्तर के निजी स्कूलों के समान होंगी।
उच्च शिक्षा के लिए, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फरवरी 2026 में घोषणा की थी कि बिहार के 55 प्रतिष्ठित अंगीभूत कॉलेजों को उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। मार्च 2026 में उच्च शिक्षा विभाग ने 54 चयनित कॉलेजों के लिए परामर्श जारी किए, और अप्रैल 2026 से काम में तेजी लाने की योजना है। इन केंद्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, AI तकनीक का समावेश और नवाचार व अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा। बिहार का पहला उत्कृष्टता केंद्र मार्च 2026 में गया में मुख्यमंत्री द्वारा 743.55 करोड़ रुपये की 693 विकास योजनाओं के हिस्से के रूप में उद्घाटित किया गया था। इसके अतिरिक्त, जुलाई 2026 में बिहार सरकार ने बिहार राज्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (AI CoE) कॉर्पोरेशन के गठन को मंजूरी दी है, जिसका नेतृत्व सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नीतीश मिश्रा कर रहे हैं। इसका लक्ष्य AI-आधारित नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देना है।
बिहार कौशल विकास मिशन (BSDM) के "कुशल युवा कार्यक्रम" (KYP) को वित्तीय वर्ष 2030-31 तक बढ़ा दिया गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इस कार्यक्रम हेतु 430.08 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। KYP में अब कंप्यूटर प्रशिक्षण और संचार कौशल के अतिरिक्त सौर ऊर्जा, ड्रोन प्रौद्योगिकी, नेटवर्किंग, होम नर्सिंग, मल्टी-स्किल्ड लैब तकनीशियन, वेब सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल मार्केटिंग और उद्यमिता जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण शामिल होगा। इस कार्यक्रम का लक्ष्य 6,436 प्रशिक्षण केंद्र संचालित करना है। साथ ही, जिन प्रखंडों में डिग्री कॉलेज नहीं हैं, वहां 213 नए डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे, जिनकी कक्षाएं जुलाई 2026 तक शुरू हो जाएंगी, ताकि विशेषकर लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच आसान हो सके।
ये व्यापक शैक्षिक सुधार बिहार के व्यवसायों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), व्यापारियों, श्रमिकों और उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। छात्रों को AI, रोबोटिक्स और मोबाइल रिपेयरिंग जैसे आधुनिक तकनीकी और व्यावसायिक कौशल से लैस करके, राज्य का लक्ष्य उद्योग की मांगों को पूरा करने वाला एक कुशल कार्यबल तैयार करना है। इससे नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, उत्पादकता बढ़ेगी और रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जिससे बिहार के समग्र आर्थिक विकास में योगदान मिलेगा। करियर-उन्मुख शिक्षा और कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करने से बिहार के युवा नौकरी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे और उद्यमिता को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
