बिहार में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय परिसर को केंद्र की मंजूरी, राज्य सरकार देगी जमीन और 50% निर्माण लागत

ThisNews Desk
बिहार में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय परिसर को केंद्र की मंजूरी, राज्य सरकार देगी जमीन और 50% निर्माण लागत
चित्र: Arturo Añez. / Pexels

केंद्र सरकार ने बिहार में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) का एक परिसर स्थापित करने की मंजूरी दे दी है। यह घोषणा बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 1-2 सितंबर, 2026 के आसपास की थी। यह पहल राज्य के सांस्कृतिक और कला क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो स्थानीय प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद करेगी।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्र के इस निर्णय का स्वागत किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, जो संस्कृति मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्थान है और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है, अब बिहार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा। यह संस्थान नाट्य कला के क्षेत्र में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए जाना जाता है।

इस परियोजना में बिहार सरकार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार परिसर के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराएगी और स्वीकृत निर्माण लागत का 50 प्रतिशत वहन करेगी। इसका मतलब है कि निर्माण पर होने वाले कुल खर्च का आधा हिस्सा राज्य सरकार देगी। इसके अतिरिक्त, संस्थान की स्थापना और सुचारु संचालन के लिए प्रशासनिक सहायता भी प्रदान की जाएगी। यह कदम राज्य में कला और संस्कृति से संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास को गति देगा। बुनियादी ढांचा विकास का अर्थ है सड़कों, इमारतों और अन्य सुविधाओं का निर्माण, जो किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक होते हैं।

हालांकि, परियोजना के लिए कुल निवेश की सटीक राशि अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसी तरह, इस परियोजना से कितनी नौकरियां सृजित होंगी, इसके विशिष्ट आंकड़े भी फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। फिर भी, एक बड़े संस्थान की स्थापना से निर्माण कार्य, रखरखाव और शिक्षण स्टाफ के रूप से अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

बिहार के कला, संस्कृति और युवा मामलों के मंत्री प्रमोद कुमार ने संकेत दिया है कि यह परिसर "पटना के पास" स्थित होगा, हालांकि किसी विशिष्ट जिले की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

वर्तमान स्थिति यह है कि केंद्र की मंजूरी मिल चुकी है, और बिहार सरकार परिसर के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान करने और उसे उपलब्ध कराने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठा रही है। यह संस्थान कला के क्षेत्र में कौशल विकास के अवसर प्रदान करेगा, जिससे स्थानीय कलाकारों, निर्देशकों, लेखकों और तकनीशियनों को लाभ मिलेगा। कौशल विकास का अर्थ है किसी विशेष कार्य को करने के लिए आवश्यक ज्ञान और क्षमता को बढ़ाना। इससे प्रशिक्षित कलाकार स्थानीय स्तर पर थिएटर समूहों, प्रदर्शन कला से संबंधित व्यवसायों और इवेंट मैनेजमेंट कंपनियों की स्थापना कर सकते हैं, जिससे राज्य में रचनात्मक उद्योगों और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। उद्यमिता का अर्थ है नए व्यवसाय शुरू करना और उनका संचालन करना।

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