गया जिले के गयाजी में 14 सितंबर, 2026 को बिहार के कृषि मंत्री विजय सिन्हा और स्थानीय विधायक मनोरमा देवी के बीच एक सार्वजनिक चर्चा हुई। यह घटना पितृ पक्ष मेला की व्यवस्थाओं की समीक्षा के बाद एक इन्फ्रा एक्सपो के मंच पर हुई।
इस दौरान विधायक मनोरमा देवी ने कहा कि अगर वह ठेकेदार नहीं होतीं तो विधायक नहीं बन पातीं। इसके जवाब में, मंत्री विजय सिन्हा ने "हमारी मानसिकता बदलने" और आगंतुकों की सेवा के लिए बिहारियों के बीच "बड़ा दिल" रखने की आवश्यकता पर जोर दिया, भले ही संसाधन सीमित हों।
विजय सिन्हा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक प्रमुख नेता और लखीसराय से विधायक हैं, जो वर्तमान में कृषि मंत्री के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने जनवरी 2024 से अप्रैल 2026 तक उपमुख्यमंत्री सहित बिहार सरकार में राजस्व एवं भूमि सुधार, नगर विकास एवं आवास, खान एवं भूविज्ञान और पथ निर्माण जैसे कई महत्वपूर्ण विभाग संभाले हैं। मनोरमा देवी गया के बेलागंज निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं।
हालांकि इस घटना में कोई विशिष्ट वित्तीय घोषणाएं शामिल नहीं थीं, लेकिन "ठेकेदारों" और "इन्फ्रा एक्सपो" का संदर्भ बिहार के व्यापार और आर्थिक परिदृश्य के लिए महत्वपूर्ण है। बिहार सरकार ने हाल ही में स्थानीय व्यवसायों और बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई नीतियां पेश की हैं।
इनमें 'बिहार क्रय वरीयता नीति 2026' शामिल है, जो 5 मई, 2026 से प्रभावी है। यह नीति स्टार्टअप्स को बिना किसी निविदा के 10 लाख रुपये तक के सरकारी कार्य आदेश प्राप्त करने की अनुमति देती है और बिहार-आधारित स्टार्टअप्स के लिए सीमित निविदा के माध्यम से 25 लाख रुपये तक के ठेके आरक्षित करती है। यह स्थानीय उद्यमों के लिए अनुभव और टर्नओवर की आवश्यकताओं में 50 प्रतिशत की छूट भी देती है। सरल शब्दों में, यह नीति नए व्यवसायों (स्टार्टअप्स) और बिहार की स्थानीय कंपनियों को सरकारी ठेके आसानी से प्राप्त करने में मदद करती है, जिससे उन्हें बढ़ने का बेहतर अवसर मिलता है।
इसके अतिरिक्त, 5 फरवरी, 2026 को अनुमोदित 'बिहार ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) नीति - 2026' पर्याप्त वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है। इसमें निश्चित पूंजी निवेश के 30 प्रतिशत तक (50 करोड़ रुपये की अधिकतम सीमा के साथ) पूंजीगत व्यय सहायता और रोजगार-आधारित प्रोत्साहन शामिल हैं। इसका उद्देश्य वैश्विक निवेश को आकर्षित करना और उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियां पैदा करना है। यह नीति बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को बिहार में अपने सहायक केंद्र (जैसे आईटी या बैक-ऑफिस संचालन) स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे निवेश आता है और स्थानीय कार्यबल के लिए अच्छी नौकरियां पैदा होती हैं।
राज्य मंत्रिमंडल ने चार राज्य राजमार्गों के निर्माण के लिए 1482 करोड़ रुपये भी स्वीकृत किए हैं, और ग्रामीण कार्य विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए परियोजनाओं हेतु 11,312 करोड़ रुपये से अधिक की मांग की है। ये बड़े सरकारी खर्च की योजनाएं हैं जो सड़कों और अन्य ग्रामीण विकास परियोजनाओं के निर्माण के लिए हैं, जिसका अर्थ है ठेकेदारों और निर्माण से जुड़े व्यवसायों के लिए अधिक काम के अवसर।
