भागलपुर नगर निगम में 22 वार्डों की उपेक्षा को लेकर चल रहा विवाद अब समाप्त हो गया है। 8 सितंबर, 2026 को महापौर डॉ. बसुंधरा लाल ने नगर आयुक्त को ₹15.71 करोड़ की संशोधित विकास योजनाओं की सूची सौंपी, जिससे भागलपुर के सभी 51 वार्डों में विकास सुनिश्चित हो सकेगा। इन परियोजनाओं के लिए टेंडर जल्द ही जारी होने की उम्मीद है।
यह निर्णय पहले की एक विवाद के बाद आया है, जब कथित तौर पर ₹11 करोड़ के टेंडर से 22 वार्डों को बाहर कर दिया गया था, जिसके कारण वार्ड पार्षदों ने विरोध प्रदर्शन किया था। नई स्वीकृत योजना आवश्यक बुनियादी ढांचे, नागरिक सुविधाओं और जलजमाव जैसी लगातार बनी रहने वाली समस्याओं के दीर्घकालिक समाधान को प्राथमिकता देती है। इसमें सड़कों का निर्माण, आरसीसी नाले (कंक्रीट के मजबूत नाले), पीसीसी रास्ते (सीमेंट-कंक्रीट के रास्ते), पेयजल पाइपलाइन बिछाना, डीप बोरिंग (गहराई तक पानी निकालने के लिए बोरवेल) और सार्वजनिक प्याऊ (पानी पीने की व्यवस्था) स्थापित करना शामिल है। ये कार्य छोटे ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं के लिए नए व्यावसायिक अवसर पैदा करेंगे।
इन परियोजनाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया में बिहार के नगर विकास एवं आवास विभाग की भी भागीदारी होगी। टेंडर एक औपचारिक प्रक्रिया है जिसके तहत सरकारी विभाग या निगम किसी काम को करवाने के लिए ठेकेदारों या कंपनियों से प्रस्ताव (बोली) आमंत्रित करते हैं। जो कंपनी सबसे अच्छी शर्तों पर काम करने का प्रस्ताव देती है, उसे आमतौर पर ठेका मिलता है। भागलपुर में पहले भी पीसीसी सड़कों और आरसीसी नालों के लिए ₹49.9 लाख और ₹50 लाख जैसे टेंडर जुलाई 2026 में जारी किए गए थे, जिनकी अंतिम तिथि अगस्त 2026 थी।
यह ₹15.71 करोड़ का आवंटन भागलपुर में चल रहे व्यापक विकास का एक हिस्सा है। मार्च 2026 में, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भागलपुर जिले के लिए 144 परियोजनाओं सहित ₹442 करोड़ के विकास पैकेज की घोषणा की थी। इसके अतिरिक्त, भागलपुर स्मार्ट सिटी परियोजना भी एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसमें क्षेत्र-आधारित विकास के लिए ₹1106.7 करोड़ का निवेश शामिल है।
