गया में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर का विस्तार तेज, हरित विकास पर जोर

ThisNews Desk
गया में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर का विस्तार तेज, हरित विकास पर जोर
चित्र: Eric Esajian / Pexels

बिहार सरकार गया में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) के विस्तार की योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा रही है। हाल ही में, 13 सितंबर, 2026 को बिहार के उद्योग सचिव कुंदन कुमार ने अधिकारियों को हरित क्षेत्रों, व्यापक भूमि उपयोग और पर्यावरणीय विचारों को शामिल करने पर विशेष जोर देने का निर्देश दिया। श्री कुमार ने IMC में चल रहे विकास और बुनियादी ढांचा कार्यों का निरीक्षण किया और परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा करने के लिए निर्माण में तेजी लाने का आदेश दिया। उन्होंने IMC से सटी भूमि के त्वरित मूल्यांकन का भी निर्देश दिया ताकि भविष्य के विस्तार की संभावनाओं का पता लगाया जा सके, जिसकी अद्यतन रिपोर्ट दो दिनों के भीतर मांगी गई है।

गया के डोभी के पास 1,670 एकड़ में फैला यह IMC प्रोजेक्ट, अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे (AKIC) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) एक बड़ा, नियोजित औद्योगिक क्षेत्र होता है जिसमें साझा सुविधाएं होती हैं। यह बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड (BIMCGL) द्वारा संचालित किया जा रहा है, जो केंद्र और बिहार राज्य सरकारों के सहयोग से गठित एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) है। SPV एक ऐसी कंपनी होती है जिसे किसी खास परियोजना के लिए बनाया जाता है। इस परियोजना को नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NICDC) और बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) का समर्थन प्राप्त है। इस परियोजना की अनुमानित लागत 1,339 करोड़ रुपये है और इससे कुल 16,524 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने तथा 109,000 से अधिक रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।

परियोजना के लिए प्रमुख स्वीकृतियाँ प्राप्त हो चुकी हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मई 2025 में पर्यावरणीय मंजूरी मिली थी। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने अगस्त 2024 में इसे मंजूरी दी थी, जबकि राज्य मंत्रिमंडल ने मई 2023 में ही इसे स्वीकृति दे दी थी। NICDC और BIADA ने नवंबर 2024 में राज्य समर्थन समझौते (SSA) और शेयरधारक समझौते (SHA) पर हस्ताक्षर करके अपनी साझेदारी को औपचारिक रूप दिया। ये कानूनी दस्तावेज भागीदारों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को रेखांकित करते हैं।

यह पहल बिहार के आर्थिक परिदृश्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य गया को अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और निवेश-अनुकूल वातावरण के साथ एक आधुनिक औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। IMC कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, भवन निर्माण सामग्री, हथकरघा और हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग और फैब्रिकेशन, चमड़े के उत्पाद और चिकित्सा उपकरण जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा। सतत विकास और हरित क्षेत्रों पर जोर बिहार की हरित औद्योगिक वृद्धि के प्रति व्यापक प्रतिबद्धता के अनुरूप है, जैसा कि बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज 2025 जैसी नीतियों से स्पष्ट है, जो पर्यावरण संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग के लिए प्रोत्साहन प्रदान करता है। इस परियोजना से श्रमिकों और उद्यमियों के लिए रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है, जिससे राज्य के पांच वर्षों में एक करोड़ रोजगार सृजित करने के लक्ष्य में योगदान मिलेगा।

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