बिहार राज्य एक महत्वपूर्ण शहरी विकास पहल शुरू कर रहा है, जिसके तहत पूरे राज्य में ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित किए जाएंगे। राज्य के शहरी विकास एवं आवास विभाग (UDHD) ने इस कार्य के लिए CEPT एडवाइजरी फाउंडेशन (CAF), अहमदाबाद के साथ साझेदारी की है। CAF, जिसे CEPT रिसर्च एंड डेवलपमेंट फाउंडेशन (CRDF) भी कहा जाता है, एक तकनीकी सहायता इकाई (TSU) स्थापित करेगा। यह इकाई आधुनिक शहरी नियोजन, स्थानिक विकास, नीति निर्माण, भूमि-उपयोग योजना, बुनियादी ढांचा विकास और दीर्घकालिक शहरी विकास रणनीतियों में विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान करेगी।
ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप क्या हैं?
ये पूरी तरह से नई बस्तियां या शहर होते हैं, जिन्हें मौजूदा शहरों के पास, बिल्कुल खाली या अविकसित ज़मीन पर बनाया जाता है। इनका उद्देश्य बड़े शहरों पर आबादी का दबाव कम करना और नए आर्थिक केंद्र बनाना होता है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार सरकार ने अप्रैल 2026 में 11 ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के विकास को मंजूरी दी थी। ये टाउनशिप 11 जिलों में प्रस्तावित हैं, जिनमें पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, छपरा, गया, सीतामढ़ी, सहरसा, पूर्णिया, मुंगेर, भागलपुर और सोनपुर (सारण) शामिल हैं। इनमें पटना में पाटलिपुत्र, गया में मगध, मुजफ्फरपुर में तिरहुत और सोनपुर (सारण) में हरहरनाथपुर जैसे विशिष्ट टाउनशिप का उल्लेख किया गया है। इन चिह्नित क्षेत्रों में मास्टर प्लान को अंतिम रूप दिए जाने तक भूमि की बिक्री, हस्तांतरण, विकास और निर्माण पर अस्थायी रोक (मोरेटोरियम) लगा दी गई है।
जुलाई 2026 में, बिहार सरकार ने हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HUDCO) के साथ ₹1 लाख करोड़ (₹1 ट्रिलियन) के दीर्घकालिक वित्तपोषण के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। यह वित्तपोषण 12 ग्रीनफील्ड टाउनशिप के विकास में सहायता करेगा। राज्य को इस परियोजना में ₹6 लाख करोड़ का अतिरिक्त निजी निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है। निजी निवेश का अर्थ है कि व्यक्तिगत निवेशक या निजी कंपनियाँ इन परियोजनाओं में पैसा लगाएंगी। गया में एक विशिष्ट ग्रीनफील्ड औद्योगिक टाउनशिप, BIMCGL, से ₹16,524 करोड़ का निवेश आकर्षित होने और 1,09,000 से अधिक रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
इस विकास में भूमि-पूलिंग मॉडल का उपयोग किया जाएगा। इसमें किसान अपनी ज़मीन को विकास के लिए स्वेच्छा से एक साथ लाते हैं, और सरकार विकसित ज़मीन का 55 प्रतिशत हिस्सा वापस किसानों को लौटाएगी। इससे किसानों को उनकी ज़मीन का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। जुलाई 2026 में चार टाउनशिप के लिए सामाजिक प्रभाव आकलन (SIA) शुरू हो गए हैं। SIA किसी भी परियोजना के सामाजिक परिणामों का मूल्यांकन होता है।
शहरी विकास की निगरानी के लिए, जुलाई 2026 में बिहार शहरी विकास विधेयक, 2026 पारित किया गया, जिसने बिहार शहरी विकास प्राधिकरण (BUDA) की स्थापना की। यह प्राधिकरण इन शहरी विकास परियोजनाओं की देखरेख करेगा।
