लखीसराय मंदिर भगदड़ के बाद बिहार सरकार धार्मिक स्थलों पर बुनियादी ढांचे में करेगी सुधार

ThisNews Desk
लखीसराय मंदिर भगदड़ के बाद बिहार सरकार धार्मिक स्थलों पर बुनियादी ढांचे में करेगी सुधार
चित्र: Pixabay / Pexels

बिहार के लखीसराय स्थित अशोकधाम मंदिर में सोमवार, 17 अगस्त 2026 को हुई भगदड़ में कम से कम सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई और एक दर्जन से अधिक घायल हो गए। यह घटना सुबह करीब 6:40 बजे हुई, जब अशोकधाम हाल्ट रेलवे स्टेशन पर एक साथ दो ट्रेनों के आने से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक बांस का बैरिकेड टूट गया और बिजली के खंभे के गिरने या बिजली के रिसाव की अफवाह से भगदड़ मच गई, जिससे लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े।

इस दुखद घटना के बाद, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख की अनुग्रह राशि (एक प्रकार की सहायता राशि, जो सरकार बिना किसी कानूनी बाध्यता के देती है) देने की घोषणा की। लखीसराय के जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार, मुंगेर के प्रमंडलीय आयुक्त प्रेम सिंह मीणा और पुलिस उप महानिरीक्षक राकेश कुमार ने घायलों से मुलाकात की। डीप नगर के थानाध्यक्ष राजमणि को निलंबित कर दिया गया है और घटना की जांच की जाएगी।

यह घटना बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर उन छोटे व्यवसायों (MSMEs), व्यापारियों, श्रमिकों और उद्यमियों के लिए जो धार्मिक पर्यटन पर निर्भर हैं। लखीसराय का अशोकधाम मंदिर बिहार के पर्यटन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। श्रावण जैसे पवित्र महीनों में होने वाले बड़े धार्मिक आयोजन स्थानीय व्यापारियों, विक्रेताओं, होटल-ढाबा चलाने वालों और परिवहन सेवा प्रदाताओं के लिए पर्याप्त आर्थिक गतिविधि उत्पन्न करते हैं।

इस घटना और पिछली भगदड़ों को देखते हुए, बिहार सरकार राज्य के प्रमुख मंदिरों में बुनियादी ढांचे और भीड़ प्रबंधन सुविधाओं को बढ़ाने की योजना बना रही है। इन सुधारों में स्थायी, एकल-पंक्ति वाले स्टेनलेस-स्टील बैरिकेड्स के साथ-साथ पीने के पानी, मूत्रालय और शौचालयों की व्यवस्था शामिल होगी, ताकि बड़ी भीड़ को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सके। यह पहल जुलाई 2026 में बिहार सरकार द्वारा 11 प्रमुख धार्मिक और विरासत स्थलों की सुरक्षा बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस (BSAP) को सौंपने के व्यापक कदम का अनुसरण करती है, जिसका उद्देश्य सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को मजबूत करना है। ये कदम न केवल श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे, बल्कि धार्मिक पर्यटन से जुड़े स्थानीय व्यवसायों के लिए एक स्थिर और सुरक्षित वातावरण भी प्रदान करेंगे।

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