बिहार सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत एक दूरगामी शैक्षिक पहल, "बिहार व्यवसायिक शिक्षा योजना 2026" का शुभारंभ किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए नियमित अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक व्यावसायिक प्रशिक्षण को एकीकृत करना है। यह पहल बिहार के छोटे व्यवसाय मालिकों, ठेकेदारों, व्यापारियों और उभरते उद्यमियों के लिए भविष्य में एक सुशिक्षित और कुशल कार्यबल तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक कदम है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
यह कार्यक्रम एक सुनियोजित और चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। पहले चरण की शुरुआत इसी वर्ष 2026 में हुई है, जिसमें राज्य भर के 555 चयनित स्कूलों में कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। अगले चरण में, 2027 तक इस योजना का विस्तार सभी जिलों में कक्षा 9 और 10 के छात्रों तक किया जाएगा, जिसमें अत्याधुनिक कौशल प्रयोगशालाओं (स्किल लैब) की स्थापना भी शामिल है ताकि छात्रों को व्यावहारिक अनुभव मिल सके। इसके बाद, 2028 तक सभी इंटर कॉलेजों और +2 स्कूलों में कक्षा 11 और 12 के छात्रों के लिए इस योजना को पूरी तरह से लागू किया जाएगा, जिसमें उद्योग जगत के साथ इंटर्नशिप और सीधा जुड़ाव भी शामिल होगा, जिससे छात्रों को वास्तविक कार्य अनुभव प्राप्त होगा।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), बिहार, इस योजना की विस्तृत कार्यान्वयन रणनीति और पाठ्यक्रम विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिसमें यूनिसेफ तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है। योजना के तहत, प्रत्येक प्रतिभागी स्कूल छात्रों को चुनने के लिए दो विशिष्ट व्यावसायिक ट्रेड प्रदान करेगा। कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों के पास अपने संबंधित स्कूलों को आवंटित इन ट्रेडों में से किसी एक को सावधानीपूर्वक चुनने का विकल्प होगा, जिससे वे अपनी रुचि और भविष्य की संभावनाओं के अनुसार कौशल विकसित कर सकें।
इस योजना के तहत सिखाए जाने वाले व्यावसायिक कौशलों के कुछ प्रमुख उदाहरणों में सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) से संबंधित कौशल, आधुनिक कृषि पद्धतियाँ और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं हार्डवेयर (जैसे जूनियर तकनीशियन के रूप में कार्य करना) शामिल हैं। ये कौशल छात्रों को न केवल भविष्य के रोजगार के अवसरों के लिए तैयार करेंगे बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने, अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू करने या मौजूदा व्यवसायों में विशेषज्ञता लाने में भी मदद करेंगे। यह योजना बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, स्थानीय उद्योगों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने और राज्य में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक कुशल मानव संसाधन तैयार करने में सहायक होगी।
