बिहार बोर्ड की मार्कशीट पर अब 'फेल' नहीं, 'कौशल प्रशिक्षण के लिए पात्र' लिखा जाएगा

ThisNews Desk
बिहार बोर्ड की मार्कशीट पर अब 'फेल' नहीं, 'कौशल प्रशिक्षण के लिए पात्र' लिखा जाएगा
चित्र: Armin Rimoldi / Pexels

बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने 29 अगस्त, 2026 को एक महत्वपूर्ण घोषणा की है, जिसके तहत अब 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों की मार्कशीट पर 'फेल' शब्द नहीं लिखा जाएगा। इस नए नियम के अनुसार, अनुत्तीर्ण छात्रों के प्रमाण पत्र पर 'कौशल प्रशिक्षण के लिए पात्र' (Eligible for Skill Training) अंकित किया जाएगा। यह बदलाव मौजूदा शैक्षणिक सत्र से लागू होगा, जिसका अर्थ है कि 2027 में बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों की मार्कशीट में यह नई व्यवस्था देखने को मिलेगी।

इस फैसले का मुख्य उद्देश्य छात्रों के मनोबल को बनाए रखना और उन्हें 'फेल' शब्द से होने वाली निराशा से बचाना है। बिहार बोर्ड के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस कदम का मकसद विद्यार्थियों को बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड (Bihar Open Schooling and Examination Board) द्वारा चलाए जा रहे व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में शामिल होने में मदद करना है। ये कार्यक्रम छात्रों को विशिष्ट हुनर सीखने का अवसर देते हैं, जिससे वे भविष्य में स्वरोजगार या नौकरी के लिए तैयार हो सकें। बिहार शिक्षा विभाग इस बदलाव को लागू करने के लिए नियमों में आवश्यक संशोधन करेगा और जल्द ही बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) को इस संबंध में निर्देश जारी करेगा।

यह नीति बिहार के व्यवसायों, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), व्यापारियों, श्रमिकों और उद्यमियों के लिए अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण है। 'कौशल प्रशिक्षण के लिए पात्र' के रूप में छात्रों को चिह्नित करके, यह उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की ओर प्रेरित करता है। इसका सीधा लाभ राज्य में एक अधिक कुशल कार्यबल (skilled workforce) तैयार करने में मिलेगा। कुशल कार्यबल का अर्थ है ऐसे लोग जिनके पास उद्योगों और व्यवसायों की जरूरतों के अनुसार विशेष दक्षता और हुनर हो। एक बेहतर प्रशिक्षित और कुशल कार्यबल अंततः छोटे-बड़े व्यवसायों को अधिक सक्षम कर्मचारी प्रदान करके लाभान्वित कर सकता है, जिससे उनकी उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।

यह फैसला बिहार के व्यापक शिक्षा सुधारों का एक हिस्सा है। बिहार सरकार ने 2026-27 के लिए शिक्षा व्यवस्था में सुधार हेतु 70,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। इस बजट का लक्ष्य बुनियादी से लेकर उच्च और तकनीकी शिक्षा तक के लिए एक आधुनिक पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है। पिछले दशक में, 2016 से 2026 के बीच, बिहार में 10,000 से अधिक नए प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय खोले गए हैं। राज्य ने 2026 में शिक्षा और सामाजिक विकास में उल्लेखनीय प्रगति दिखाई है, जिसमें साक्षरता दर में वृद्धि और तकनीकी शिक्षा पर विशेष जोर शामिल है। इसके अतिरिक्त, बिहार सरकार ने सरकारी विभागों में तकनीकी और विशेष सेवाओं के लिए युवा पेशेवरों की नियुक्ति को सुव्यवस्थित करने हेतु 'युवा पेशेवर चयन नीति-2026' को भी मंजूरी दी है। शिक्षा में समग्र सुधार, जिसमें रटने की बजाय कौशल-केंद्रित पाठ्यक्रम और आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देना शामिल है, दीर्घकालिक रूप से बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

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